
*धनबाद: 19 जुलाई 2026* : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, धनबाद महानगर द्वारा शताब्दी वर्ष के अंतर्गत रविवार को आई.आई.टी. आई.एस.एम. धनबाद के GJLT सभागार में “युवा संगोष्ठी” का आयोजन किया गया।
इस संगोष्ठी में सरकारी, गैर-सरकारी, अर्ध-सरकारी कार्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों में सेवारत 20 से 35 वर्ष आयु वर्ग के 223 युवा उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र पर दीप प्रज्वलन कर हुआ तत्पश्चात आईएसएम के प्रोफेसर धीरज कुमार ने आज के कार्यक्रम की भूमिका रखी।

युवाओं ने पंच परिवर्तन एवं राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका विषय पर मंचासीन अधिकारियों से संवाद किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता क्षेत्र सामाजिक सद्भाव संयोजक, (बिहार-झारखंड) श्री राकेश लाल रहे। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि संघ अपने स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण कर रहा है। राष्ट्र निर्माण एवं सामाजिक समरसता की इस एक सदी की यात्रा में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, स्व का बोध, सामाजिक समरसता, स्वदेशी और नागरिक कर्तव्य इन पांच विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
श्री राकेश लालजी ने कहा कि “पढ़ाई के साथ संस्कार और देशभक्ति जरूरी है। तभी हम गुलामी की मानसिकता से ऊपर उठकर आत्मनिर्भर भारत का निर्माण कर सकते हैं।”पंच परिवर्तन का संदेश: संगोष्ठी में संघ के ‘पंच परिवर्तन’ के मुख्य एजेंडे पर चर्चा की गई, जिसमें सामाजिक समरसता (जातिगत भेदभाव मिटाना), कुटुंब प्रबोधन (पारिवारिक मूल्य),
पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवन शैली और नागरिक कर्तव्य शामिल हैं।सामाजिक एकता पर जोर:
कार्यक्रम में वक्ता द्वारा हिंदू समाज को संगठित करने और राष्ट्र निर्माण के लिए जातिवाद जैसी बाधाओं को दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
वैचारिक विमर्श: युवाओं को औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त होकर भारतीय भाषाओं, स्वदेशी वस्तुओं और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया गया।संगठन का विस्तार: शताब्दी वर्ष (100 वर्ष) के इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर स्थानीय शाखाओं के माध्यम से नए युवाओं को राष्ट्र सेवा की मुख्यधारा से जोड़ने की योजना साझा की गई।
सक्रिय भागीदारी: केवल व्याख्यान ही नहीं, बल्कि युवाओं के साथ सीधा संवाद (Interactive Session) किया गया ताकि उनके सवालों के जवाब दिए जा सकें।
बदलाव की शुरुआत: प्रत्येक युवा को अपने घर और मोहल्ले से ही सामाजिक बदलाव और स्वच्छता की शुरुआत करने का संकल्प दिलाया गया।
धर्मांतरण पर रोक: समाज के वंचित वर्गों को सशक्त बनाने और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखने की रणनीति पर विचार हुआ।
डिजिटल और स्वदेशी: आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए भारतीयता और राष्ट्रवाद का प्रचार करने की बात कही गई।
कुटुंब प्रबोधन: परिवारों में बढ़ते बिखराव को रोकने के लिए साप्ताहिक पारिवारिक बैठकें आयोजित करने पर बल दिया गया।
सज्जन शक्ति का जागरण: समाज के प्रबुद्ध और सकारात्मक सोच वाले लोगों को एक मंच पर लाकर सामूहिक नेतृत्व विकसित करने की योजना बनी।
पर्यावरण संकल्प: जल संरक्षण, प्लास्टिक का उपयोग बंद करने और हर शुभ अवसर पर पौधारोपण करने की आदत डालने का आह्वान किया गया।
अनुशासन और समय: युवाओं को देश की प्रगति के लिए व्यक्तिगत जीवन में समय प्रबंधन और अनुशासन अपनाने की सीख दी गई।
स्वावलंबन पर ध्यान: युवाओं को स्वरोजगार और स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया गया।
सामाजिक समरसता: समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने और छुआछूत जैसी कुरीतियों को पूरी तरह समाप्त करने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महानगर संघचालक श्री नित्यानंद पाण्डेय जी ने की। उन्होंने कहा कि युवा ही राष्ट्र की रीढ़ हैं। संघ का उद्देश्य युवाओं को चरित्रवान और राष्ट्र के प्रति समर्पित बनाना है।
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