
दिल्ली में देश भर के 550 से अधिक जनजातीय समाज के लोग जुटे। संख्या लाखों में थी जिसमें अपने झारखंड से भी जनजाति समाज का नेतृत्व करते हुए सन्नी टोपो उरांव जी तथा उनके साथी सम्मिलित हुए।
यह केबल देश के 11 करोड़ जनजाति आदिवासियों का मुद्दा नहीं है।

“तू और मैं एक रक्त हैं” इस मंत्र के साथ शुरू हुआ आंदोलन भारत का सांस्कृतिक आंदोलन है। क्योंकि जब तक जनजातीय समाज की संस्कृति बचेगी, तभी तक भारत की संस्कृति बचेगी।

आज आदिवासी समाज को विदेशी धर्मों के आक्रमण से बचाना होगा । आदिवासी संस्कृति भारतीय संस्कृति का नर्व सेंटर है, रावण की नाभि। इसपर आक्रमण हुआ तो पूरी भारतीय संस्कृति को दुःख झेलना होगा। इसलिए भगवान बिरसा मुंडा सहित कई जनजातिय विर और विरांगनाओं ने अंग्रेजों के विरुद्ध लोहा लेते हुए उलगुलान किया था। इसलिए उन्होंने मिशनरियों के ख़िलाफ़ उलगुलान किया था।
आदिवासी समाज भ्रांतियों से बचें, भेद डालने वालों को पहचानें और एकजुट होकर विकसित व समृद्ध भारत की ओर आगे बढ़ें।
डीलिस्टिंग जो आदिवासी ईसाई या इस्लाम धर्म अपना चुके हैं वैसे लोगों का आरक्षण और सारी सुविधा आदिवासी नाम पर मिलने वाला बन्द हो… किसी नेता ने इसपर क्या कहा , किसी नेता ने क्यूं नहीं कहा ये मायने नहीं उन्हें ध्यान में हैं की धर्मान्तरण गलत है #आदिवासी समाज जाग चुका है
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