
*चाईबासा* : रांची लोकसभा एवं ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके पूर्व प्रत्याशी तथा एंटी करप्शन ऑफ इंडिया के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष धी. रामहरि पेरियार ने जिले की रक्त भंडारण एवं वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि जिला उपायुक्त महोदय के नेतृत्व में प्रत्येक माह दो बार आयोजित होने वाला रक्तदान अभियान सराहनीय पहल है। इसके माध्यम से जिले में सैकड़ों यूनिट रक्त एकत्रित किया जाता है और बड़ी संख्या में लोग स्वेच्छा से रक्तदान कर मानवता एवं सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय देते हैं। लेकिन विडंबना यह है कि आवश्यकता पड़ने पर मरीजों एवं उनके परिजनों को समय पर रक्त उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने कहा कि पूरे जिले में प्रत्येक माह आयोजित रक्तदान शिविरों में सैकड़ों यूनिट रक्त एकत्रित किया जाता है। बड़ी संख्या में लोग स्वेच्छा से रक्तदान कर मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय दे रहे हैं, लेकिन विडंबना यह है कि आवश्यकता पड़ने पर मरीजों एवं उनके परिजनों को सदर अस्पताल ब्लड बैंक में समय पर रक्त उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

उन्होंने कहा कि कई मामलों में मरीजों के परिजनों को रक्त की तलाश में मजबूरन जमशेदपुर जाना पड़ता है। आने-जाने में चार से पांच घंटे का समय लग जाता है, जिससे मरीज के परिजनों को आर्थिक, मानसिक एवं शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आपातकालीन परिस्थितियों में यह देरी मरीज के जीवन के लिए भी खतरा बन सकती है।

धी. रामहरि पेरियार ने कहा कि पूरे जिले में नियमित रूप से रक्तदान होने के बावजूद यदि जरूरतमंदों को समय पर रक्त नहीं मिल रहा है, तो यह केवल संसाधनों की कमी का नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी का संकेत है। यह स्थिति रक्तदाताओं और आम जनता के बीच कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रक्तदान के प्रति लोगों का विश्वास लगातार कमजोर पड़ रहा है। लोग यह जानना चाहते हैं कि जब जिले में हर माह सैकड़ों यूनिट रक्त संग्रहित किया जा रहा है तो वह रक्त आखिर कहां जा रहा है और जरूरतमंद मरीजों को क्यों उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। यदि इस प्रश्न का स्पष्ट उत्तर नहीं दिया गया तो भविष्य में स्वैच्छिक रक्तदान अभियान भी प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने मांग की कि जिले में आयोजित सभी रक्तदान शिविरों से प्राप्त कुल रक्त संग्रह, ब्लड बैंक में उपलब्ध वर्तमान स्टॉक, विभिन्न अस्पतालों में रक्त की आपूर्ति, उपयोग एवं वितरण संबंधी संपूर्ण जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाए।
इसके लिए अस्पतालों, ब्लड बैंकों तथा स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट एवं सूचना पट्टों पर नियमित रूप से अद्यतन आंकड़े जारी किए जाने चाहिए।उन्होंने कहा कि जब तक रक्त संग्रहण और वितरण व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी नहीं होगी तथा वास्तविक आंकड़े जनता के सामने नहीं रखे जाएंगे, तब तक लोगों में जागरूकता की कमी और अविश्वास की भावना बनी रहेगी। रक्तदान करने वाला प्रत्येक व्यक्ति सम्मान, भरोसे और पारदर्शिता का हकदार है।
धी. रामहरि पेरियार ने कहा कि यदि रक्तदान करने वाले व्यक्ति या उसके परिवार को जरूरत पड़ने पर रक्त उपलब्ध नहीं होता, तो यह व्यवस्था की गंभीर विफलता है। आखिर ऐसी कौन-सी बाधाएं हैं जिनके कारण रक्तदाता और मरीज दोनों परेशान हैं? जनता इसका जवाब चाहती है।
उन्होंने जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग एवं संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, रक्त भंडारण एवं वितरण प्रणाली का सामाजिक ऑडिट कराने तथा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह एवं जनहितैषी बनाने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी भी जरूरतमंद मरीज को रक्त के अभाव में परेशानी का सामना न करना पड़े।
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