
सरायकेला-खरसावां जिला के कुकड़ू प्रखंड में बुनियादी सुविधाओं की कमी और स्वीकृत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवन का निर्माण शुरू नहीं होने के विरोध में मंगलवार को प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया गया।
झारखंड आंदोलनकारी मोर्चा, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के संयुक्त नेतृत्व में हुए इस धरने में स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, कृषि समेत कई मुद्दे उठाए गए। आंदोलनकारियों ने 14 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की चेतावनी दी थी, लेकिन चांडिल अनुमंडल पदाधिकारी के प्रतिनिधि द्वारा जल्द कार्रवाई के आश्वासन के बाद फिलहाल भूख हड़ताल स्थगित कर दी गई है।

*16 साल बाद भी सुविधाओं का टोटा -*

आंदोलनकारियों ने बताया कि वर्ष 2009 में नीमडीह की 4 और ईचागढ़ की 5 पंचायतों को मिलाकर कुकड़ू प्रखंड बना था। 16 साल बाद भी यहां स्थायी प्रशासनिक व्यवस्था नहीं है। अधिकांश विभागों के अधिकारी दूसरे प्रखंडों के अतिरिक्त प्रभार में चल रहे हैं, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन में दिक्कत हो रही है।
प्रमुख मुद्दा – PHC भवन का निर्माण ,धरने का मुख्य मुद्दा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवन है। आंदोलनकारियों के अनुसार जिला परिषद की ओर से 15वें वित्त आयोग के स्वास्थ्य मद से भवन की स्वीकृति मिली थी। इसके लिए करीब *1.96 एकड़ सरकारी जमीन* चिह्नित, टेंडर, संवेदक चयन, कार्यादेश और शिलान्यास व भूमि पूजन तक हो चुका है, फिर भी एक साल से निर्माण शुरू नहीं हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि PHC बनने से 9 पंचायतों के लोगों को लाभ मिलेगा और इलाज के लिए बंगाल / पुरुलिया पर निर्भरता कम होगी।
*छह सूत्री मांगें -*
1. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवन का निर्माण तत्काल शुरू किया जाए
2. प्रखंड के विभिन्न विभागों में स्थायी पद सृजित किए जाएं
3. तिरुलडीह थाना को कुकड़ू में स्थानांतरित किया जाए
4. झारखंड आवासीय बालिका विद्यालय में विषयवार शिक्षिकाओं और महिला सुरक्षा गार्ड की नियुक्ति हो
5. कृषि प्रधान क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज और अतिरिक्त विद्युत सब-स्टेशन का निर्माण हो
6. JSLPS से जुड़ी महिला कर्मियों को बीमा, यात्रा भत्ता और मोबाइल भत्ता दिया जाए
सुनील कुमार महतो, जिला परिषद उपाध्यक्ष प्रतिनिधि “आज एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल है। अगर सुनवाई नहीं हुई तो भूख हड़ताल करेंगे। मध्य स्थल पर PHC का शिलान्यास और वर्क ऑर्डर हो चुका है, फिर भी काम शुरू नहीं हुआ। डीसी ने जांच की, रिपोर्ट नहीं दिखी। विधायक-सांसद को संज्ञान लेना चाहिए। स्वास्थ्य केंद्र नहीं होने से हम लोग इलाज के लिए बंगाल पर निर्भर हैं।”
मधुश्री महतो, जिला परिषद उपाध्यक्ष “PHC नहीं होने से डॉक्टर-नर्स की व्यवस्था नहीं है। 5 महीना पहले शिलान्यास किया, धरातल पर काम नहीं हुआ। ऐसा पहली बार देखा कि शिलान्यास के बाद भी काम शुरू नहीं हुआ। हमने एक सप्ताह पहले BDO, CO और SDO को धरने की सूचना दी थी, आज सभी नदारद हैं।”
राकेश रंजन महतो, विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन अध्यक्ष “16 साल में पहली बार स्वास्थ्य केंद्र आया, उस पर भी राजनीतिकरण हो रहा है। कागजों में इसे पहाड़ वाली वीरान जमीन पर ले जाने की बात है, जहां हाथियों का आतंक रहता है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।”
धरने में दुबराज महतो, प्राण चंद्र महतो, आशीष कुमार महतो, गंगाधर महतो समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं एवं पुरुष मौजूद थे।
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