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सरायकेला : आजादी के 78 साल बाद भी नहीं पहुंची विकास की रोशनी, शियालगोड़ा के आदिवासियों ने खुद बनाया 3 किमी सड़क, चुनाव में बैरिकेटिंग की चेतावनी ।

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BySubhasish Kumar

Sep 14, 2026
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सरायकेला : चांडिल अनुमंडल के नीमडीह प्रखंड अंतर्गत बाड़ेदा पंचायत के शियालगोड़ा, काशीडीह, रापकाड़ा, भूषणडीह टोला में करीब 200 आदिवासी परिवार आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।
पुरुलिया-जमशेदपुर जिला के सीमावर्ती क्षेत्र पड़ता हे ।दोनों जिला को जोड़ने वाले सांसागडीह होते शियालगोड़ा तक जाने वाली मुख्य सड़क आजादी से अब तक कच्ची है। नाराज ग्रामीणों ने सोमवार को निजी स्तर पर श्रमदान कर 3 किमी सड़क का निर्माण किया।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि आगामी चुनाव में हर गांव में बैरिकेटिंग कर सांसद, विधायक और अधिकारियों को घुसने नहीं देंगे और वोट मांगने से रोकेंगे।
क्षेत्र में संथाल, भूमिज, मुंडा समुदाय के लोग कृषि और दलमा जंगल पर निर्भर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि झारखंड अलग हुए 26 वर्ष हो गए, लेकिन पक्की सड़क, बिजली, शुद्ध पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिली।
बाड़ेदा स्वास्थ्य केंद्र 3-4 किमी दूर है, कीचड़ भरे रास्ते में एम्बुलेंस नहीं पहुंचती। बरसात में हाथी, भालू, सांप-बिच्छू का खतरा रहता है। ईचागढ़ विधायक सविता महतो को लिखित शिकायत देने के बाद भी कोई पहल नहीं हुई।
सोमवार को मुखिया वरुण कुमार सिंह सरदार के नेतृत्व में 200 से अधिक ग्रामीण कुदाल, गैंता लेकर सड़क निर्माण में जुटे। ट्रैक्टर से 10 हजार CFT मुरुम लाकर सड़क को चलने लायक बनाया गया। इस दौरान बलराम मंडी, श्याम प्रसाद हांसदा, जीतू बेसरा, राजू सोरेन सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।
सहिया शांतिमय मार्डी ने कहा “मैं सहिया का काम करती हूं, बोल-बोलकर थक गई, फिर भी रोड नहीं बना। समय पर एम्बुलेंस नहीं आती, महिलाओं का प्रसव घर में ही हो जाता है। विधायक और मुख्यमंत्री दोनों आदिवासी हैं, फिर भी हमारी कोई नहीं सुनता।”
राजू सोरेन ने कहा”आजादी की लड़ाई आदिवासियों ने लड़ी, लेकिन हमें सच्ची आजादी नहीं मिली। न रास्ता, न पानी, न बिजली। मरीज को 3 किमी कंधे पर ढोना पड़ता है। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते।”
ग्रामीणों ने बताया कि यह सड़क साधु महतो के कार्यकाल में 3 किमी तक शिलान्यास हुई थी, उसके बाद से कोई काम नहीं हुआ। पेपर में रोज शिलान्यास की खबर आती है, पर धरातल पर कुछ नहीं दिखता।

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