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बड़कागांव: त्रिवेणी सैनिक कंपनी पर वादाखिलाफी का आरोप, विस्थापित ने माइंस में ही गाड़ा खूंटा

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Dec 18, 2025

 

बड़कागांव (हजारीबाग): एनटीपीसी पकरी बरवाडीह परियोजना की एमडीओ कंपनी, त्रिवेणी सैनिक माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड, एक बार फिर गंभीर विवादों में घिर गई है। एक विस्थापित ग्रामीण के साथ हुई कथित धोखाधड़ी और वादाखिलाफी का मामला सामने आया है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

 

📍 क्या है पूरा मामला?

पीड़ित विस्थापित का आरोप है कि कंपनी ने नौकरी का झांसा देकर उनका पुश्तैनी घर तुड़वा दिया, लेकिन अब जॉइनिंग देने में आनाकानी कर रही है।

 

जमीन का योगदान: पीड़ित ने कंपनी को अपनी लगभग 2 एकड़ 32 डिसमिल जमीन उपलब्ध कराई है।

 

प्रक्रिया पूरी, पर जॉइनिंग नहीं: पीड़ित के अनुसार, 20 सितंबर 2025 को कंपनी ने उनका मेडिकल टेस्ट और बीटीसी (BTC) प्रशिक्षण भी पूरा करवा लिया था।

 

धोखाधड़ी का आरोप: महीनों बीत जाने के बाद भी उन्हें काम पर नहीं रखा गया, जबकि उनका घर पहले ही उजाड़ा जा चुका है।

 

⛺ माइंस में ही आशियाना बनाने की कोशिश

जब दफ्तरों के चक्कर काटने से कोई समाधान नहीं निकला, तो पीड़ित ने विरोध का अनोखा रास्ता चुना:

 

गुरुवार को पीड़ित ने मंझली डाडी माइंस क्षेत्र में खूंटा गाड़कर और टेंट लगाकर रहने का प्रयास किया।

 

वहां मौजूद त्रिवेणी सैनिक के दर्जनों सुरक्षाकर्मियों और सुरक्षा प्रभारियों ने उन्हें रोक दिया और खूंटा उखाड़ दिया।

 

⚠️ प्रशासन की चुप्पी पर ग्रामीणों का आक्रोश

इस घटना ने क्षेत्रीय ग्रामीणों के गुस्से को और भड़का दिया है। ग्रामीणों का कहना है:

 

पुराना इतिहास: कंपनी पर पहले भी जबरन घर और मंदिर तोड़ने के आरोप लगते रहे हैं।

 

प्रशासनिक मिलीभगत: लोगों का आरोप है कि जिला प्रशासन और सरकार कंपनी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है, जिससे उनके हौसले बुलंद हैं।

 

विस्थापितों का सवाल: घर और जमीन खोने के बाद अब वे सड़कों पर हैं। उन्हें न्याय आखिर कब मिलेगा?

 

रिपोर्टर: पंकज ठाकुर

 


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