
संवाददाता :नरेश विश्वकर्मा
निरसा :निरसा के मांगूरडीह लावघाटा के मैदान में उन्नीस सौ बत्तीस के खतियान को लागू कराने की मांग को लेकर ! आंदोलन के क्रम में आज युवा नेता जयराम महतो पहुँचे मांगूरडीह लावघाटा

लावघाटा के ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया!लावघाटा के मैदान हजारों संख्या में लोग उस युवा नेता को देखने के लिये पहुँचे जयराम ने कहा की हम झारखंडियो को अपना अधिकार मिले और हमारा हक़ मिले जमीन हमारा और राज तुम्हारा नहीं चलेगा!

इस सम्बन्ध में उन्होंने कहा कि आज ओबीसी जाति के लोगों को कोई हक़ नहीं मिला हैं!जिसको लेकर हम पुरे झारखण्ड में घूम घूम कर अपने समाज को जागरूक कर रहे हैं! इस सम्बन्ध में जयराम महतो से मिडिया ने सवाल किया!आप तो केवल उन्नीस सौ बत्तीस की खतियान लागू करने की बात करते हैं, जिसका बत्तीस का खतियान रहेगा, वहीं झारखंडी कहलायगा और जिसका नहीं हैं, जिसका नहीं हैं वह झारखंडी नहीं हैं!
लेकिन जयराम ने तुरंत अपने बातो से मुकरते हुए कहा की मैं ऐसा थोड़े कह रहा हूँ, की जो झारखंडी नहीं हैं, उसे यहाँ से भागा दीजिये, उन्होंने कहा की मेरा बाहरी भीतरी का लड़ाई नहीं हैं, आज हमारा लड़ाई ओबीसी जाति को लेकर हैं, उन्होंने हमारे झारखण्ड के मुख्य्मंत्री को अच्छा बताया, जयराम को यह मालूम नहीं की झारखण्ड राज्य अलग हुए! तेइस वर्ष हो गया!और सबसे ज्यादा यहाँ पर आदिवासी ही मुख्यमंत्री बना जो की झारखण्ड का आजतक विकास नहीं हूआ!
जबकि कुछ लोगों ने पर आरोप लगाया कि झारखंड के कई मुद्दे हैं जिसपर जयराम ने कुछ नहीं कहा, वे मात्र 1932 के खतियान को लेकर झारखण्ड के भोले भाले जनता को अपनी राजनीती रोटी सेक रहे हैं ! उसका मकसद है किसी तरह हम इस क्षेत्र से विधान सभा या लोकसभा का चुनाव में खड़ा होने के लिये, जनता के भावना को भड़का कर अपना स्वार्थ सिद्ध करें, आज निरसा की जनता को ज्ञात है कि ,कुछ साल पहले रामाश्रय सिंह ने निरसा विधान सभा के पुरे घटवार समाज को पंचेत से लेकर डीबीसी तक के विस्थापितों को नौकरी दिलाने के नाम पर बरगलाया लेकिन अपना सिक्का ज़माने के लिये, निरसा के विधान सभा के घटवार समाज के लोगों को छलने का काम किया!
आजतक दामोदर नदी के किनारे वाले को जमीन के बदले में कुछ नहीं दिया!उसी तरह जयराम महतो भी वहीं करेंगे बड़े बड़े बाते करते हैं, अंत में वहीं ढाक के तीन पात इनका आंदोलन साबित होगा।
जेएमएम के कार्यकर्ताओं ने कहा – कि निरसा की जनता जानती है कि एमपील से लेकर डीबीसी तक विस्थापितों को अगर इंसाफ दिलाने का काम किया!तो एक मात्र ऐसे नेता हैं, वह हैं, जे एम एम के नेता अशोक मण्डल उन्होने ही मैथन के विस्थापितों को हक़ दिलाने का काम किया, हैं!
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