डूमरी:( धीरज कुमार गिरि)प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित सार्वजनिक दुर्गा मंडपों में सादगीपूर्ण वातावरण में सोमवार से शारदीय नवरात्र की शुरुआत हुई।पहले दिन मां दुर्गे के पहले रूप माता शैलपुत्री की पूजा अर्चना पूरे विधि विधान से की गई।वनांचल चौक के समीप स्थित सार्वजनिक दुर्गा मंडप में पूजन अनुष्ठान संपन्न करा रहे मनोज पांडेय ने बताया कि 3 अक्टूबर को महाअष्टमी व 4 अक्टूबर को महानवमी की पूजा एवं हवन के साथ नवरात्र का समापन होगा।मंदिर समिति के संरक्षक प्रशांत जायसवाल के द्वारा नवरात्र के दौरान अखंड ज्योत का संकल्प किया गया है।समिति के संरक्षक श्री जायसवाल,प्रो.धनेश्वर महतो,मनोज सिंह अध्यक्ष राजेन्द्र जायसवाल सचिव बिरेन्द्र कुमार सिन्हा उप सचिव प्रियरंजन जायसवाल कोषाध्यक्ष आशीष अग्रवाल सदस्य शंकर ठाकुर,रामचन्द्र मंडल,जगरनाथ ठाकुर,बिट्टु भगत आदि ने संयुक्त रूप से बताया कि सादगीपूर्ण तरीके से पूजा कार्यक्रम संपन्न कराया जा रहा है।इस दौरान रामानन्द शर्मा,शंकर बरनवाल,चंदन बिन्द,सुरेन्द्र बिन्द,बिनोद विश्वकर्मा,बबलू अग्रवाल,भुनू केवट,द्वारिका मंडल,झरीलाल महतो,राम बाबू आदि की भूमिका सराहनीय है इसी तरह डुमरी,इसरीबाजार, स्टेशन परिसर,चैनपुर,धावाटांड़,नगरी,निमियाघाट, लक्ष्मणटुंडा,तेलखारा आदि विभिन्न क्षेत्रों में अवस्थित दुर्गा मंडपों में समारोहपूर्ण तरीके से पूजा अर्चना कार्य संपन्न कराए जा रहे हैं।शक्ति व समृद्धि की देवी दुर्गे के भक्तजन श्रद्धालुओं ने अपने अपने घरों में भी कलश स्थापना कर नवरात्र पूजा प्रारंभ की।इस दौरान पूरे नौ दिन फलाहार कर भक्त माता की पूजा अर्चना व देवी की स्तुति करते हैं।वहीं क्षेत्र की संबंधित पूजा कमिटी शांति व सौहार्द के साथ पूजा कराने में जूटे हुए हैं। फोटो:&&&&( पूजा के दौरान उपस्थित मंदिर समिति के सदस्य) There is no ads to display, Please add someAdmin OfficeLike this:Like Loading... Related Post Disclaimerस्पष्टीकरण : यह अंतर्कथा पोर्टल की ऑटोमेटेड न्यूज़ फीड है और इसे अंतर्कथा डॉट कॉम की टीम ने सम्पादित नहीं किया है Disclaimer :- This is an automated news feed of Antarkatha News Portal. It has not been edited by the Team of Antarkatha.com Post navigation पंचेत ओपी थाना ओपी और कालूबथान थाना ओपी क्षेत्र में अभी भी अबैध बालू की ढुलाई जारी महालया के साथ ही नवरात्रा शुरू…गोसाईडीह बैंक कॉलोनी मे बांग्ला और संस्कृत परंपराओं से महिषासुर मर्दिनी मां दुर्गा का आवाहन