
सरायकेला : चौका-ईचागढ़ मुख्य सड़क किनारे बसा गांव, आजादी के 78 साल बाद भी बिजली, पानी, शिक्षा और सड़क के लिए तरस रहा गांव ।
झारखंड अलग हुए दो दशक से ज्यादा हो गए, देश को आजाद हुए 78 साल, लेकिन जिले के चावलीबासा पंचायत के खुदियाडीह गांव तक आज भी विकास की रोशनी नहीं पहुंची है। हरे-भरे जंगल के बीच बसा यह विशुद्ध आदिवासी गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।
ग्रामीणों का दर्द तब और बढ़ गया जब मुखिया फंड से स्वीकृत 200 फीट पीसीसी पथ का निर्माण गांव से वापस कर दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया। सालों तक जनप्रतिनिधियों से आश्वासन ही मिला, काम नहीं। अंत में ग्रामीणों ने अपनी रोजी-रोटी की कमाई से चंदा कर कंपनी से चारकोल खरीद कर 350 फीट लंबी सड़क का निर्माण खुद कर लिया।
*मुख्य सड़क पर, फिर भी विकास से दूर -*
यह गांव चौका-ईचागढ़ स्टेट हाईवे के किनारे बसा है, बावजूद इसके गांव में बिजली और पीने के पानी की दयनीय स्थिति है। डिजिटल युग में भी गांव के बच्चे शिक्षा से वंचित हैं।ग्रामीणों का कहां हमारे ईचागढ़ विधायक सविता महतो ने सड़क का शिलान्यास कर रहे ।ओर देख भी गया ।परन्तु आज तक दो बार विधायक बने उसके प्रश्चात हमारे गांव पर विधायक मैडम का नजर नहीं पड़ा जो दुखद वाते कहे ।
*स्कूल था, विलय कर दिया गया -*
ग्रामीणों ने बताया कि सर्व शिक्षा अभियान के तहत गांव में नव प्राथमिक विद्यालय खोला गया था, जिसे बाद में विलय कर दिया गया, जबकि गांव में 5 से 12 बर्ष के 35-40 बच्चे हैं। इन बच्चों को पढ़ने के लिए 1.5 से 2 किमी दूर जाना पड़ता है और उसके लिए अति व्यस्त चौका-पातकुम मुख्य सड़क पार करनी पड़ती है। वहीं प्रखंड में कई ऐसे स्कूल हैं जहां 5-10 बच्चे ही हैं, फिर भी उन्हें बंद नहीं किया गया।
इस अवसर पर अनिल बास्के, सोमचंद बास्के, रमेश हांसदा, समल सोरेन, फूलचंद टुडू, डेनियल मुर्मू, श्यामल हांसदा, रबींद्र सोरेन समेत गांव के लोग मौजूद थे। ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव में बिजली, पानी, सड़क और स्कूल की सुविधा बहाल करने की मांग की है।
There is no ads to display, Please add some


Post Disclaimer
स्पष्टीकरण : यह अंतर्कथा पोर्टल की ऑटोमेटेड न्यूज़ फीड है और इसे अंतर्कथा डॉट कॉम की टीम ने सम्पादित नहीं किया है
Disclaimer :- This is an automated news feed of Antarkatha News Portal. It has not been edited by the Team of Antarkatha.com
