
आज दिनांक 29/9/026 को धनबाद के मवईटांड़ पातड़ाकुली कालिबाड़ा मंदिर के सामने जिला अध्यक्ष सुजित रंजन मुखाजी की अध्यक्ष में झारखंड बांग्ला भाषा उन्नयन समिति ने शहिद मातंगिनी हाजरा की शहिद दिवस मनाई गई। कार्यक्रम में संस्थापक बेंगू ठाकुर ने कहा की मातंगिनी हाजरा के जन्म पश्चिम बांग्ला मेर्दीनपुर गांव में 19 अक्तुवर 1870 को हुआ था। शहिद मातंगिनी हाजरा स्वंतत्रता संग्राम की एक महान और निडर वीरांगना थी। उन्हें मुख्य रूप से उनकी अदम्य वीरता, देशभक्ती और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में उनके सर्वोच्च बलिदान के लिए याद किया जाता है। 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन में उनका उम्र 73 साल की थी। उन्होंने 50 हजार मातृ शक्ती और पुरूषों को लेकर आजादी लड़ाई में ईंगरेेशों का हालात पतली खराब हो गई थी। उस समय उनके हाथो में तिरंगा झण्डा को लेकर चारो तरफ ईंगरेेशों का घेराव किये थे। ईंगरेज का सिपाही ने अंधाधुंध गोली चलाना शुरू कर दी। मातंगिनी हाजरा को तीन गोली लगने बावजूद वन्दे मातरम कहते हुए आगे बढ़ते गये। अन्त में तिरंगा झण्डा को जमिन पर गिरने नहि दिया। झण्डा के डाण्डा को पेट में जाहा गोली लगी थी उसिजगह में झण्डा को शरीर के छेद में गाड़ दिये और शहिद हो गई। आज 1942 भारत छोड़ो के जननेत्री का ईतिहास के पन्ना में कहि नाम नहि है, और ना ही शहिद मातंगिनी हाजरा को शहिद का दर्जा दिया है। झारखंड बांग्ला भाषा उन्नयन समिति केंद्र और राज्य सरकार से मांग करती है शहिद मातंगिनी हाजरा को राष्ट्रीय सम्मान दिया जाय।
आज के कार्यक्रम में

तरुण गोस्वामी, बादल सरकार, पारितोष घोषाल, लाल जीत गोराई, रघुनाथ राय, तपन रॉय, अशोक पाल, समीर सरकार, गोविन्दो ठाकुर, उदय गोस्वामी, प्रतिमा कर्मकार, ब्यूटी कर्मकार, रोकतीमा सरकार, अनित कर्मकार, कृष्ण मिश्रा उपस्थित थे।

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