
सरायकेला : जिले के ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत तिरुलडीह नदी घाट पर अवैध बालू खनन का खेल दिनदहाड़े बेखौफ जारी है। नियमों के अनुसार पुल से 500 मीटर के दायरे में खनन पूरी तरह प्रतिबंधित होने के बावजूद पुल के ठीक नीचे से बालू का उठाव किया जा रहा है।


मौके की तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि नदी के बीचों-बीच दर्जनों ट्रैक्टर और हाइवा बालू लोड कर रहे हैं। इससे न सिर्फ कानून की धज्जियां उड़ रही हैं बल्कि पर्यावरण और नदी के प्राकृतिक स्वरूप को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है। पुल की नींव को भी खतरा बताया जा रहा है।
*थाना 1 से डेढ़ किमी दूर, फिर भी कार्रवाई नहीं..?* हैरानी की बात यह है कि तिरुलडीह थाना महज 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होने के बावजूद इस अवैध गतिविधि पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। इससे प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
*मिलीभगत का आरोप:..?* स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सारा खेल प्रशासनिक मिलीभगत से चल रहा है। बताया जा रहा है कि प्रतिदिन सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों ट्रैक्टर बालू का उठाव कर रहे हैं। खनन विभाग, स्थानीय पुलिस और अन्य जिम्मेदार तंत्र की चुप्पी इस अवैध कारोबार को बढ़ावा दे रही है।
लोगों का कहना है कि दिन-रात बालू ढुलाई से सड़कें खराब हो रही हैं और धूल से ग्रामीण परेशान हैं। नदी का जलस्तर भी प्रभावित हो रहा है।
*कौन दे रहा संरक्षण:..?* अब सवाल उठ रहा है कि आखिर इस अवैध खनन को संरक्षण कौन दे रहा है। इतने बड़े पैमाने पर हो रही गतिविधि बिना सांठगांठ के संभव नहीं है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और खनन विभाग से उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल इस मामले में खनन विभाग और तिरुलडीह थाना प्रभारी का पक्ष नहीं मिल सका है।
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