
संवाददाता अंतर्कथा केरेडारी बालमुकुंद दास
केरेडारी प्रखण्ड/ विशेष संवाददाता: केरेडारी प्रखंड के चट्टी बारियातू पंचायत अंतर्गत एनटीपीसी पगार साइडिंग के बाहर बिरसा विस्थापित यूनियन के बैनर तले चल रहा अनिश्चितकालीन धरना मंगलवार को और तेज हो गया।

चौदह दिन बीत जाने के बाद भी जिला प्रशासन और कंपनी प्रबंधन की ओर से कोई पहल नहीं होने पर धरना स्थल पर आयोजित प्रेस वार्ता में यूनियन ने अनिश्चितकालीन संपूर्ण नाकेबंदी आंदोलन की घोषणा की।

इस दौरान यूनियन ने एनटीपीसी प्रबंधन के समक्ष 18 सूत्री मांगें भी रखीं।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष योगेंद्र साव ने कहा कि झारखंड जल, जंगल और जमीन की लड़ाई से बना है, लेकिन आज यह संघर्ष सीधे ग्रामीणों के अस्तित्व और पहचान से जुड़ गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कोयला खनन के नाम पर कंपनियों ने गांव के भोले-भाले लोगों से ठगी कर जमीन ली, लेकिन भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन अधिनियम 2013 के तहत न तो उचित मुआवजा दिया गया और न ही प्रभावित परिवारों का पुनर्वास किया गया।
योगेंद्र साव ने कहा कि आदिवासी, दलित, शोषित-वंचित और असहाय परिवार जब अपने हक और अधिकार की मांग करते हैं, तो उन्हें न्याय देने के बजाय फर्जी मामलों में फंसा कर जेल भेज दिया जाता है। विकास के नाम पर अत्याचार और शोषण हो रहा है, जिससे ग्रामीणों का जीवन नारकीय बन गया है। भय और दहशत के माहौल में स्थानीय भू-रैयतों के बच्चे दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर हैं।
उन्होंने प्रदूषण और सुरक्षा के मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि क्षेत्र में धूल और जहरीली हवा ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। तेज रफ्तार हाईवा वाहनों से आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं और लोगों की जान जा रही है। इन सभी समस्याओं को लेकर यूनियन ने एनटीपीसी से 18 सूत्री मांगों को शीघ्र पूरा करने की मांग की।
प्रेस वार्ता में यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष योगेंद्र साव के अलावा मुहम्मद मजहर अंसारी, मोहम्मद जिलानी, शंकर राणा, शोयब, पारसनाथ महतो, रमनी देवी, सुनीता देवी सहित दर्जनों आंदोलनकारी उपस्थित रहे।
यूनियन ने स्पष्ट किया कि जब तक 18 सूत्री मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक अनिश्चितकालीन संपूर्ण नाकेबंदी और आंदोलन जारी रहेगा।
प्रेस वार्ता में यूनियन के योगेंद्र साव, रामकुमार दुबे, अलावा मुहम्मद मजहर अंसारी, मोहम्मद जिलानी, शंकर राणा, शोयब, पारसनाथ महतो, रमनी देवी, सुनीता देवी सहित दर्जनों आंदोलनकारी उपस्थित रहे।
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