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एनटीपीसी चट्टी बारियातू कोयल माइंस से गोदावरी कंपनी के खूनी हाईवा के पहियों ने फिर दो चिराग को बुझा दिया

Byadmin

Jan 10, 2026

 

संवाददाता अंतर्कथा केरेडारी बालमुकुंद दास

केरेडारी/हजारीबाग के बाद अब चतरा की सड़कों पर बिछ रही लाशें,ऐसे एनटीपीसी कंपनी और ट्रांसपोर्टरों पर हो कानूनी करवाई,कब जागेगा जनता और प्रशासन?

कोयला ढुलाई या मौत का तांडव? वृंदा मोड़ पर गोदावरी कंपनी के वाहन ने दो को कुचला, वाहन फरार,

वृंदा मोड़ हादसा में संतोष सिंह और सुनील सिंह की स्थिति नाजुक, एनटीपीसी के गोदावरी कंपनी की लापरवाही पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा,

हजारीबाग जिले के केरेडारी से एनटीपीसी चट्टीबारियातु माइंस (सीबी) से कोयला ढुलाई में लगी गोदावरी कंपनी की मनमानी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी अब आम जनता की जान पर भारी पड़ रही है लेसुकवार टंडवा,मिश्रौल,सिमरिया, चतरा के सड़के इन दिनों खूनी तांडव के साथ लाल हो रही है। 09 जनवरी की संध्या लगभग 5:30 बजे मुख्य सड़क स्थित वृंदा मोड़ पर एक अनियंत्रित कोल हाईवा वाहन ने रोला गांव निवासी संतोष सिंह और सिमरिया निवासी सुनील सिंह को बेरहमी से कुचल दिया। कुचलने के बाद कोल वाहन चालक मौके से फरार हो गया, जो कंपनी की चालकों व कर्मियों को गैर-जिम्मेदाराना कार्यशैली को दर्शाता है। फिलहाल स्थानीय राहगीरों की मदद से दोनों को गंभीर अवस्था को देखते हुवे इलाज के लिए हजारीबाग रेफर कर दिया गया।

इन दिनों एनटीपीसी @कोल ट्रांसपोर्टिंग कंपनियां सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ा रही हैं,

चतरा,टंडवा, सिमरिया और कटकमसांडी की सड़कों पर यह एनटीपीसी कंपनी का आतंक पर्याय बन चुकी है। ओवरस्पीडिंग और असुरक्षित परिचालन से सड़कें खून से लाल हो रही है। दुर्घटना में घायल व्यक्ति संतोष और सुनील की स्थिति नाजुक बनी हुई है और उन्हें रेफर कर दिया गया है। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि बार-बार होने वाले हादसों के बावजूद गोदावरी कंपनी हो यह और अन्य कंपनियां के ट्रांसपोर्टिंग वाहनों पर कोई सख्त कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

सुरक्षा नियमों के उल्लंघन करने वालें कोल ट्रांसपोर्टिंग कंपनी के वाहनों तथा कंपनी के कर्मियों पर कानूनी कार्यवाही करने की एवंम् पब्लिक रोड से ट्रांसपोर्टिंग नहीं करने ,मुआवजा और स्पीड गति चलने वाले वाहनों पर ब्लैकलिस्ट जैसे करवाई करने की मांग स्थानीय ग्रामीणों ने किया है। जब तक पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा नहीं मिलता और कंपनी के वाहनों की गति सीमा तय नहीं होती, तब तक परिचालन रोक लगाने की माँग कि है।


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