
सरायकेला चांडिल वन क्षेत्र के अधीन ईचागढ़, चांडिल और नीमडीह प्रखंड क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से हाथियों के आतंक से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। शाम ढलते ही हाथियों का झुंड जंगल से निकलकर गांवों में प्रवेश कर जा रहा है और घरों को निशाना बनाकर रखे अनाज-चावल को अपना निवाला बना रहा है।
*घरों और फसलों को पहुंच रहा नुकसान*

हाथियों के झुंड गरीब किसानों की खेतों में लगी फसलों के साथ-साथ मिट्टी के घरों को भी तोड़ रहे हैं। दिहाड़ी मजदूरी कर थके-हारे किसान रात में सोते हैं और इसी बीच हाथी गांव में घुसकर घरों को क्षतिग्रस्त कर देते हैं। एक तरफ बारिश, दूसरी तरफ हाथियों का कहर – ग्रामीण डरे-सहमे हुए हैं।

*झिमरी और अंडा गांव में तोड़े घर*
शनिवार देर रात झिमरी गांव में हाथियों ने खगेन महतो के मकई की खेती नष्ट कर दी। इसके बाद घर में घुसकर चावल खा लिया और घर को तोड़ दिया। घर टूटने की आवाज सुनते ही परिवार के सभी लोग पीछे के रास्ते से निकलकर दूसरे घर में जाकर अपनी जान बचाने में सफल रहे।
रविवार दिन में करीब 4 बजे अंडा गांव में रघुनाथ सिंह के घर को हाथियों ने तोड़कर क्षति पहुंचाई।मुआवजा की राशि की मांग ।दिया जाए सुरक्षा ।
*वन विभाग की भूमिका पर सवाल*
इस संबंध में चांडिल वन क्षेत्र के पदाधिकारी कुछ भी बताने से बचते नजर आए। इससे ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति नाराजगी देखी गई।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि इतना बड़ा दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी और गज परियोजना रहने के बावजूद हाथियों के झुंड सेंचुरी से पलायन क्यों कर रहे हैं? एलिफेंट ड्राइव टीम द्वारा हाथियों को खदेड़ा क्यों नहीं जा रहा है?
ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि अविलंब हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ा जाए और प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जाए, ताकि फसल और जान-माल की सुरक्षा हो सके।
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