
बेरमो/ऊपरघाट –

दहेज प्रथा के खिलाफ समाज में जागरूकता की बातें अक्सर सुनने को मिलती हैं, लेकिन बहुत कम लोग इसे अपने जीवन में उतारते हैं। ऐसे में बोकारो जिले के कोठी गांव से एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है, जिसने क्षेत्र में नई सोच को बढ़ावा दिया है।

पेंक-नारायणपुर थाना क्षेत्र के ग्राम कोठी निवासी पारा शिक्षक रीतलाल महतो ने अपने पुत्र लोकनाथ का विवाह हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र के गोविंदपुर गांव की पूजा के साथ बिना दहेज के सादगीपूर्ण तरीके से संपन्न कराया। इस पहल ने आसपास के लोगों का ध्यान आकर्षित किया है और समाज में एक सकारात्मक संदेश पहुंचाया है।
इसी तरह डालेश्वर महतो ने भी अपने पुत्र सुनील का विवाह मुंगो रंगामाटी गांव में बिना दहेज के कर समाज के सामने एक सराहनीय उदाहरण प्रस्तुत किया। दोनों परिवारों के इस निर्णय की पूरे इलाके में चर्चा हो रही है।
समाजसेवी दिलीप कुमार महतो ने कहा कि दहेज प्रथा के कारण कई बार अच्छे रिश्ते बनने से पहले ही टूट जाते हैं। शादी के समय अनावश्यक मांगों के चलते परिवारों के बीच तनाव पैदा होता है, जो आगे चलकर गंभीर विवाद का रूप ले सकता है। उन्होंने कहा कि दहेज मुक्त विवाह से आपसी सम्मान और विश्वास को बढ़ावा मिलता है।
स्थानीय लोगों ने इन पहलों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यदि अधिक से अधिक लोग इस दिशा में कदम उठाएं, तो दहेज जैसी सामाजिक बुराई को खत्म करने में मदद मिलेगी।
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