
प्रशिक्षु आईएएस सुश्री ईरा जोरवाल ने 5, मरीजों को लिया गोद, डॉ.जगन्नाथ हेंब्रम ने भी 21 एवं डॉ.आलोक रंजन महतो ने 5 मरीजों को निक्षय मित्र के तौर पर लिया गोद
टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जिला प्रशासन, पश्चिमी सिंहभूम द्वारा संचालित “प्रोजेक्ट जागृति-बेहतर स्वास्थ्य की ओर एक कदम” के तहत सदर अस्पताल-चाईबासा परिसर स्थित कुपोषण उपचार केंद्र में पोषण बास्केट वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उपायुक्त मनीष कुमार, उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार एवं प्रशिक्षु आईएएस ईरा जोरवाल की उपस्थिति में कुल 77 टीबी मरीजों के बीच पोषण बास्केट का वितरण किया गया।

कार्यक्रम के दौरान 40 टीबी मरीजों को पहली बार, 11 मरीजों को दूसरी बार, 09 मरीजों को तीसरी बार तथा 17 मरीजों को चौथी बार पोषक आहार किट उपलब्ध कराया गया। जिले में “प्रोजेक्ट जागृति” तहत संचालित अभियान के तहत विभिन्न पदाधिकारियों, संस्थानों आदि के द्वारा निक्षय मित्र के तौर पर तकरीबन 3000 मरीजों को गोद लेकर पोषण टोकरी दिया जा रहा है। पोषण बास्केट के माध्यम से टीबी मरीजों को उपचार के साथ-साथ पर्याप्त एवं पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि मरीजों के स्वास्थ्य में सुधार हो तथा वे निर्धारित अवधि तक नियमित रूप से उपचार जारी रखते हुए टीबी से पूर्णतः स्वस्थ हो सकें।

इस अवसर पर प्रशिक्षु आईएएस ईरा जोरवाल द्वारा 5 टीबी मरीजों को गोद लिया गया। वहीं जिला चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. जगन्नाथ हेंब्रम ने भी 21 टीबी मरीजों को गोद लेते हुए उनके बीच पोषण आहार किट उपलब्ध कराया। डॉ. आलोक रंजन महतो ने 5 मरीजों को निक्षय मित्र के तौर पर गोद लिया। इस पहल के माध्यम से टीबी मरीजों को उपचार अवधि के दौरान आवश्यक सहयोग एवं पोषण संबंधी सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ समाज के विभिन्न वर्गों को टीबी मरीजों के प्रति संवेदनशील एवं सहयोगात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
जिला प्रशासन की ओर से बताया गया कि “प्रोजेक्ट जागृति” का उद्देश्य टीबी मरीजों को केवल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उनके समग्र स्वास्थ्य एवं पोषण की स्थिति को बेहतर बनाना है। टीबी के उपचार में नियमित दवा सेवन के साथ संतुलित एवं पौष्टिक आहार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसी उद्देश्य से जिले में टीबी मरीजों को पोषण सहायता प्रदान करने तथा उन्हें गोद लेकर उपचार के दौरान सहयोग देने की पहल को निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है।
कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ. मीना कालुंडिया, जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. आलोक रंजन महतो, जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ. जगन्नाथ हेंब्रम, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. शिवचरण हांसदा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक नीरज कुमार सहित टीबी विभाग के पदाधिकारी-कर्मी एवं विभिन्न क्षेत्रों से आए टीबी मरीज उपस्थित रहे।
जिला प्रशासन ने आमजनों से अपील की कि टीबी के लक्षण दिखाई देने पर इसे छिपाने के बजाय तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं। नियमित जांच, समय पर उपचार, निर्धारित अवधि तक दवा का सेवन और पौष्टिक आहार के माध्यम से टीबी को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। साथ ही, समाज के सक्षम नागरिक एवं संस्थाएं टीबी मरीजों को गोद लेकर उनके उपचार एवं पोषण में सहयोग कर टीबी मुक्त पश्चिमी सिंहभूम के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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