
जमशेदपुर । झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) रांची के तत्वाधान में शनिवार को जमशेदपुर व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित लोक अदालत हॉल में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) पर एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), पूर्वी सिंहभूम, श्री अरविंद कुमार पांडेय के निर्देशानुसार और डालसा सचिव कुमार सौरभ त्रिपाठी के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित की गई।
कार्यशाला में मुख्य रूप से पीड़ित परिवारों को त्वरित न्याय दिलाने, बीमा दावों के निष्पादन में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करने और विभिन्न हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विस्तृत चर्चा की गई।

इस गरिमामयी कार्यशाला में बतौर अतिथि एवं मुख्य वक्ता जिला न्यायाधीश-1 श्री कनकन पट्टादार, जिला न्यायाधीश-2 श्री आनंद मणि त्रिपाठी और जिला न्यायाधीश-5 सुश्री मंजू कुमारी एवं डालसा सचिव कुमार सौरभ त्रिपाठी मुख्य रूप से उपस्थित रहे । उन्होंने एमएसीटी मामलों के कानूनी पहलुओं, न्यायिक प्रक्रियाओं और हालिया संशोधनों पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम का संचालन और समन्वय डीएलएसए, जमशेदपुर के मनोज कुमार सिंह LADCs Jamshedpur द्वारा किया गया। उन्होंने कार्यशाला के उद्देश्यों पर चर्चा करते हुए सभी विभागों से पीड़ित पक्षों को समय पर मुआवजा दिलाने में सहयोग की अपील की। कार्यशाला में उपस्थित अधिवक्ता मध्यस्थ सह विभिन्न बीमा कंपनियों के पैनल अधिवक्ता सत्येंद्र कुमार सिंह और अधिवक्ता मध्यस्थ सह नागरिक सुरक्षा (सिविल डिफेंस) के मास्टर ट्रेनर कमल कांत सिन्हा ने भी प्रतिभागियों को एमएसीटी मामलों में तकनीकी बारीकियों से अवगत कराया। इस मौके पर कार्यशाला में लीगल एड डिफेंस कौंसिल के चीफ विदेश सिन्हा सहित पुलिस प्रशासन, चिकित्सा और बीमा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न हितधारकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
• पुलिस अधिकारी एवं चिकित्सा क्षेत्र के डॉक्टर
• विभिन्न बीमा कंपनियों के अधिकारी एवं उनके विद्वान पैनल अधिवक्ता
• पीड़ितों/आवेदकों की ओर से पैरवी करने वाले विद्वान अधिवक्ता
• लीगल एड डिफेंस काउंसिल (LADCs) के सदस्य
• जिला विधिक सेवा प्राधिकार के पैरा लीगल वालंटियर्स (PLVs)
कार्यशाला के अंत में सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को बिना किसी विलंब के कानूनी सहायता और उचित मुआवजा सुनिश्चित करना है।
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