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हाथी नहीं बांध सकते तो बालू माफिया कैसे?’ वनपाल का विधायक से सीधा सवाल

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May 17, 2026
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सरायकेला :चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में हाथी-मानव संघर्ष पर विधायक सविता महतो के “हाथी को बांध कर नहीं रखा जा सकता” वाले बयान के बाद वन विभाग के एक अधिकारी की प्रतिक्रिया सामने आई है। चांडिल वन क्षेत्र के वनपाल वसिष्ठ नारायण महतो ने बयान पर सवाल उठाते हुए बालू माफियाओं के मुद्दे पर भी विधायक से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

 

वनपाल वसिष्ठ नारायण महतो ने कहा, “जब विधायक महोदया खुद समझ रही हैं कि हाथी को बांध कर नहीं रखा जा सकता, तो वे अपने क्षेत्र के बालू माफियाओं को भी यही बात क्यों नहीं समझातीं?” उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग वनरक्षी द्वारा यही बात कहने पर ग्रामीणों को भड़काने का काम करते हैं।

 

वनपाल ने सवाल किया, “हाथी सिर्फ वन विभाग को घेरने के लिए है? विधायक के इस बयान पर गांव वालों ने उनको घेरने का काम क्यों नहीं किया? आज वो लोग कहां हैं जब विधायक खुद हाथी समस्या की सच्चाई बता रही हैं?”

 

*नीति निर्माण का जिक्र:*

उन्होंने कहा, “विधायक खुद नीति निर्माण का काम करते हैं और विभाग सिर्फ उनके द्वारा बनाई गई नीतियों का क्रियान्वयन करता है। अगर विधायक के इस बयान के बाद भी गांव वालों की कोई प्रतिक्रिया नहीं आती है तो हाथी के मुद्दे पर गांव वालों को वन विभाग को नहीं घेरना चाहिए।”

 

गौरतलब है कि चांडिल-ईचागढ़ कुकड़ू,नीमडीह क्षेत्र में हाथी-मानव संघर्ष और अवैध बालू खनन दोनों बड़े मुद्दे हैं। हाल के दिनों में हाथियों के हमले से कई लोगों की जान गई है। वहीं 15 मई को ही खनन विभाग ने ईचागढ़ में अवैध बालू ले जाते ट्रैक्टर जब्त किए थे।

 

*राजनीतिक प्रतिक्रिया:*

वनपाल के बयान पर अभी तक विधायक सविता महतो या उनके कार्यालय की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। विपक्षी दलों ने भी इस पर टिप्पणी नहीं की है। एक ही मात्र समाजसेवी राकेश रंजन महतो विस्थापित अधिकार मंच पाउंड्स के अध्यक्ष ने आवाज उठाया ,ईचागढ़ विधानसभा चुनाव में करीब 29 उम्मीदवार चुनाव लड़े थे आज बाकी उम्मीदवार कहा विलुप्त होगा ,जनता जानना चाहते हे।..?

ईचागढ़ विधान सभा में चुनाव बाद विपक्ष की चुप्पी पर उठ रहे सवाल, 27 उम्मीदवारों की भूमिका पर चर्चा ।

 

ईचागढ़ विधानसभा चुनाव में इस बार 29 उम्मीदवार मैदान में थे। चुनाव के दौरान बड़ी-बड़ी रैलियां, वादे और भीड़ जुटाने का दौर चला। लेकिन चुनाव नतीजों के बाद विपक्षी नेताओं की सक्रियता को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं।

 

हाल ही में विधायक सविता महतो के “हाथी को बांध कर नहीं रखा जा सकता” वाले बयान के बाद क्षेत्र में चर्चा है कि चुनाव लड़ने वाले बाकी 27 उम्मीदवारों में से किसी ने भी इस पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी।

 

*लोगों के सवाल:*

1. *जन मुद्दों पर चुप्पी क्यों?* – हाथी-मानव संघर्ष, अवैध बालू-पत्थर खनन और विकास कार्यों में अनियमितता ईचागढ़ के बड़े मुद्दे हैं। 15 मई को ही खनन विभाग ने ईचागढ़ में अवैध बालू ले जाते ट्रैक्टर जब्त किया था। लोगों का कहना है कि चुनाव हारने के बाद ज्यादातर उम्मीदवार इन मुद्दों पर न आवाज उठाते हैं, न मीडिया से बात करते हैं।

2. *सिर्फ चुनाव तक सक्रियता?* – चुनाव में बड़े वादे करने वाले नेता नतीजों के बाद क्षेत्र से दूरी बना लेते हैं। इससे विपक्ष की भूमिका कमजोर पड़ती है।

 

*वजह क्या हो सकती है?*

– *संसाधन की कमी*: चुनाव के बाद कई छोटे दल/निर्दलीय उम्मीदवारों के पास संगठन और फंड की कमी हो जाती है।

– *कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा*: कई नेता धरना-प्रदर्शन की जगह RTI, कोर्ट या प्रशासन को ज्ञापन देने का रास्ता चुनते हैं, जो मीडिया में कम दिखता है।

– *राजनीतिक गणित*: कुछ उम्मीदवार अगला चुनाव देखकर मुद्दा चुनते हैं। हर बयान पर प्रतिक्रिया देना जरूरी नहीं समझते।

 

*लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका*

लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष जरूरी है। सत्ता पक्ष से सवाल पूछना, जन समस्याएं उठाना और सरकार की नीतियों पर नजर रखना विपक्ष का काम है। अगर 29 में से कोई भी नेता सक्रिय नहीं है तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चिंता की बात है।

 

फिलहाल ईचागढ़ में हाथी समस्या और अवैध खनन दो सबसे बड़े मुद्दे हैं। प्रशासन कार्रवाई कर रहा है, लेकिन जनता चाहती है कि चुने हुए प्रतिनिधि के अलावा चुनाव लड़ने वाले बाकी नेता भी इन मुद्दों पर लगातार क्यों नहीं आवाज उठाएं।

 

2024 विधानसभा चुनाव में ईचागढ़ सीट से कई उम्मीदवार मैदान में उतरे थे —

सविता महतो (JMM), अजमल बल्खी (Independent), अनुप कुमार महतो (Independent), अरविंद कुमार सिंह (Independent), आशुदेव महतो (Independent), आशुतोष महतो (Independent), बिरेंद्र नाथ मांझी (Abua Jharkhand Party), बृहस्पति सिंह सरदार (Independent), हरे लाल महतो (AJSU Party), कल्याण चंद्र सिंह (BSP), खगन महतो (Independent), मनु दत्ता (Independent), एमडी कय्यूम खान (Independent), प्रवेश कुमार (Sampoorna Bharat Kranti Party), पृथ्वीनाथ महतो (Right to Recall Party), रामहरी गोप (Ambedkarite Party of India), रिजवान (NCP), शंभू गोराई (Independent), श्याम बिहारी प्रजापति (Bhagidari Party), सुधाकर सिंह (Bharat Adivasi Party), सुखराम हेम्ब्रम (Independent), तरुण महतो (Jharkhand Loktantrik Krantikari Party) और तुलसी दास महतो (Independent) समेत कई चेहरे जनता के बीच आए।

 

वन विभाग के वरीय अधिकारियों ने कहा कि वनपाल का बयान उनका व्यक्तिगत मत हो सकता है। विभाग का काम वन्यजीव संरक्षण औरवो मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना है। अवैध खनन पर कार्रवाई खनन विभाग और जिला प्रशासन करता है।


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