
कथा में भगवान श्रीकृष्ण जन्म महोत्सव धूम-धाम से मनाया गया। इस पावन अवसर पर संपूर्ण कथा पंडाल भक्तिरस में सराबोर हो उठा और ऐसा प्रतीत होने लगा मानो भोपाल स्वयं वृंदावन धाम में परिवर्तित हो गया हो। भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य की मंगल बेला पर भक्तों ने जयकारों, भजनों और नृत्य के माध्यम से अपने आनंद और उत्साह की अभिव्यक्ति की।महोत्सव में भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की मनमोहक झांकी निकाली गई, जिसने सभी भक्तों का मन मोह लिया। चारों ओर गूंजते मधुर भजन, शंखनाद और हरिनाम संकीर्तन से वातावरण दिव्य और अलौकिक बन गया। भक्त बड़ी संख्या में इस उत्सव में सम्मिलित हुए और नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की के जयघोषों से पूरा कथा पंडाल गुंजायमान हो उठा।
अपने बच्चों का नाम भगवान के नाम पर रखना चाहिए। जब घर में बार-बार राम, कृष्ण, राधा, शिव, सीता, लक्ष्मी या नारायण जैसे दिव्य नामों का उच्चारण होता है, तो वातावरण भी पवित्र और सकारात्मक बनता है। भगवान के नाम में अपार शक्ति है। बच्चों का नाम यदि भगवान के नाम पर रखा जाए, तो उनके जीवन में भी उन दिव्य गुणों को अपनाने की प्रेरणा मिलती है। नाम केवल पहचान नहीं, बल्कि संस्कारों की पहली सीढ़ी होता है।

राम मंदिर में चोरी करने वाले कभी भी सुखी नहीं रह सकते है। जो व्यक्ति भगवान के घर से धन, आभूषण या किसी भी प्रकार की वस्तु चुराने का प्रयास करता है, वह कभी वास्तविक सुख और शांति प्राप्त नहीं कर सकता। जब मनुष्य ईश्वर से दूर होकर केवल स्वार्थ और लालच के पीछे भागता है, तब उसका विवेक नष्ट होने लगता है और वह सही-गलत का भेद भूल जाता है। सनातन धर्म हमें सिखाता है कि दूसरों की वस्तु पर अधिकार करने के बजाय ईमानदारी, परिश्रम और भगवान पर विश्वास के मार्ग पर चलना चाहिए।

यदि हम चाहते हैं कि हमारे बच्चों के भीतर अच्छे संस्कार, नैतिकता और धर्म के प्रति श्रद्धा विकसित हो, तो उन्हें बचपन से ही श्रीमद्भागवत, श्रीरामायण और श्रीमद्भगवद्गीता का ज्ञान देना आवश्यक है। यदि घर-घर में श्रीमद्भागवत और श्रीरामायण का पाठ, कथा-श्रवण और भगवान के नाम का स्मरण होगा, तो आने वाली पीढ़ी संस्कारी, चरित्रवान और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित बनेगी। प्रत्येक माता-पिता का कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों को इन पवित्र ग्रंथों का ज्ञान दें, ताकि वे जीवन में सदैव धर्म, सत्य और सदाचार के मार्ग पर चल सकें।
जिस दिन सभी सनातनी अपने धर्म, संस्कृति और मूल्यों के प्रति एकजुट होकर खड़े हो जाएंगे, उस दिन भारत पुनः विश्वगुरु बनने की दिशा में और अधिक सशक्त कदम बढ़ाएगा। एकता में अपार शक्ति होती है। जब समाज आपसी मतभेद, जाति, क्षेत्र और भाषा से ऊपर उठकर धर्म, सेवा और सदाचार के मार्ग पर एक साथ चलता है, तब राष्ट्र का विकास भी तेज़ी से होता है। सनातन धर्म का मूल संदेश है—सत्य, करुणा, सेवा, सहिष्णुता और “वसुधैव कुटुम्बकम्” अर्थात सम्पूर्ण विश्व को एक परिवार मानना।। इस कथा को सफल बनाने में मंतोष साधू बाबा,तपन कुमार गोप सधर्मपत्नी श्रीमती पारूल देवी विनोद महतो सधर्मपत्नी ऊतरा देवी,आदि समस्त साबलपुर गोसाईडीह जियलगढा पंचायत के लोगों के सहयोग किया जा रहा है।कल दिनांक 24/07/2026 दिन शुक्रवार गोवर्धन पूजा बाल लीला छप्पन भोग लगाया जाएगा।
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