• Mon. May 4th, 2026

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की भूमि रही है बंगाल: विवेक प्रताप सिंह

admin's avatar

Byadmin

May 4, 2026
crescent ad

 

माननीय प्रधानमंत्री सर और माननीय गृह मंत्री सर का हृदय तल से धन्यवाद। इन्होंने आम हिंदुओं की भावना को समझा और बंगाल में परिवर्तन लाने के लिए धर्म युद्ध छेड़ दिया। जिस प्रकार से माननीय प्रधानमंत्री सर और माननीय गृह मंत्री सर ने पर्सनल लेवल पर इस चुनाव को लिया उस दिन ही यह तय हो गया था कि बंगाल में भाजपा की सरकार आ रही है।

 

 

सिंह ने कहा कि बहुत पुरानी बात नहीं है जब बंगाल भारत की राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक सांस्कृतिक आंदोलनों आदि में अग्रणी भूमिका में था। इस प्रान्त के बुद्धिजीवियों एवं राजनेताओं की सभ्यताई समझ और सांस्कृतिक चेतना ने भारतवर्ष को सदैव नूतनता प्रदान करने का काम किया। इसीलिए तो 18वीं-19वीं शताब्दी एवं 20वीं शताब्दी के प्रारंभिक दशकों तक बंगाल भारतीय राष्ट्रवाद और सामाजिक-सांस्कृतिक पुनर्जागरण की प्रयोगशाला बना गया था। इस उपक्रम में अनगिनत नाम जुड़े हुए है। राजा राममोहन रॉय, ईश्वरचन्द्र विद्यासागर, रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानन्द, बंकिम चन्द्र च‌ट्टोपाध्याय, रविन्द्रनाथ टैगोर, विपिन चन्द्र पाल, सुभाष चन्द्र बोस, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, त्रैलोक्यनाथ चक्रवर्ती जैसे लोग उन अनगिनत समाज सुधारकों, राजनेताओं, सांस्कृतिक आध्यात्मिक पुरुषों में कुछ नाम हैं जिन्होंने भारत के इतिहास पर स्वर्णिम छाप छोड़ी है। लेकिन आज पश्चिम बंगाल की अर्थव्यवस्था, सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन और राजनीतिक परिस्थिति क्या है? यही बात बंगालवासियों दिलों में घर कर गई।

जिस प्रकार महिलाओं पर अत्याचार हुआ यह बात माननीय प्रधानमंत्री जी और माननीय गृह मंत्री जी से सहन नहीं हुई और उन्होंने उसे समय ही तय कर लिया कि अब यहां पर महिलाओं का खोया सम्मान वापस दिलाना है।

 

बंगाल की वर्तमान स्थिति

 

वर्तमान समय में पश्चिम बंगाल की स्थिति निराशाजनक है। विश्व सभ्यता के इतिहास में कहा गया है कि जब कोई व्यक्ति बिना किसी विचारधारा के समाज को देखता या समझता है तो समाज की विचारधारा उन्हें जल्द ही अपनी चपेट में ले लेती है। इसी वजह से ममता बनर्जी का चुनावी एजेंडा काम नहीं आया क्योंकि जनता को समय के साथ यह अहसास होने लगा कि अशिक्षित नेता केवल लोकतंत्र के लिए बोझ हैं। साथ ही ममता बनर्जी की छवि खराब हुई क्योंकि जिस विचारधारा के खिलाफ उन्होंने लड़ाई शुरू की थी वह शासनकाल के दौरान कहीं नहीं दिखाई दी। ममता बनर्जी के 15 वर्ष के शासनकाल में यह देखा गया कि उनके अशिक्षित मंत्री निरंकुश हो गए। राज्य में अनियंत्रित साम्प्रदायिक हिंसा एवं हिन्दुओं को अपने घरों से दूर कर आपसी नकारात्मक विचारधाराओं का निर्माण किया जा रहा था।

 

पश्चिम बंगाल निरुद्देश्य और पक्षपाती दृष्टिकोण के लिए पहचान बना चुका था। ममता ने राज्य को शासित करने के अपने सबसे महत्वपूर्ण और स्थाई कार्य की उपेक्षा की है। इस प्रक्रिया में अल्पसंख्यक और साम्प्रदायिक सीमाओं को लांघ दिया है।

 

ममता बनर्जी, एच. एस. सुहरावर्दी के नक्शे कदम पर चल रही थी जिसने समाज का ध्रुवीकरण किया । मार्क्सवादियों और ममता शासन ने बंगाल की परम्परागत छवि को क्षति पहुंचाई है और नकारात्मक छवि तैयार की है। परिणामस्वरूप भारत की पुनर्जागरण राजधानी के रूप में पहचान रखने वाला बंगाल ‘भ्रष्ट साम्प्रदायिक राज्य’ के रूप में सामने आया है।

 

निरंकुश और सबकुछ अपने नियंत्रण में रखने वाले स्वभाव की नेता ममता ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की दमनकारी नीति का पालन करके लोकतंत्र को धोखा दिया और विभिन्न ‘षड्यंत्र सिद्धांतों’ को जन्म दिया है। यही नहीं, ममता ने भारतीय सेना को भी नहीं छोड़ा, राज्य में सेना की उपस्थिति को तख्ता पलट के रूप में देखा। ममता दीदी के राज में लोकतंत्र का कोई भी स्तंभ अपने कार्य निष्पक्षता से नहीं कर पा रहा था। संदेश खली आरजी कर जैसे मुद्दों ने उनकी विदाई तय कर दी थी। इस बार चुनाव बंगाल की जनता लड़ रही थी उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री सर के आवाहन को सुना और उसे पूरा करने के लिए खुद ही लग गए । शांतिपूर्ण वातावरण में चुनाव कराने का पूरा का पूरा श्रेय माननीय गृह मंत्री सर के नेतृत्व में गृह मंत्रालय को जाता है।

 

अंत में सामाजिक कार्यकर्ता विवेक प्रताप सिंह ने बंगाल चुनाव में लगे सभी कार्यकर्ताओं का आभार जताया की उन्होंने दिन रात एक करके इस सरकार को जड़ से उखाड़ने का काम किया।


There is no ads to display, Please add some
Post Disclaimer

स्पष्टीकरण : यह अंतर्कथा पोर्टल की ऑटोमेटेड न्यूज़ फीड है और इसे अंतर्कथा डॉट कॉम की टीम ने सम्पादित नहीं किया है
Disclaimer :- This is an automated news feed of Antarkatha News Portal. It has not been edited by the Team of Antarkatha.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *