
सरायकेला-खरसावां : जिले के कुकड़ू प्रखंड में बिजली की अनियमित आपूर्ति और हाथी-मानव संघर्ष की समस्या के स्थायी समाधान को लेकर गुरुवार को तिरुलडीह बिजली फीडर कार्यालय में अहम बैठक हुई। जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो की अध्यक्षता में कार्यपालक अभियंता, विद्युत विभाग के साथ हुई बैठक में कई अहम फैसले लिए गए।
चांडिल अनुमंडल के कुकड़ू प्रखंड के विभिन्न गांवों में लंबे समय से बिजली आपूर्ति बाधित रहने से ग्रामीण परेशान हैं। इसी समस्या को लेकर जिप उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने विद्युत कार्यपालक अभियंता, सरायकेला-खरसावां के साथ बैठक की। बैठक में सभी पंचायतों के बिजली उपभोक्ता भी शामिल हुए।

कुकड़ू हाथी बहुल क्षेत्रहै। यहां 24 घंटे बिजली मिलनी चाहिए। रात में अंधेरा होने से हाथी गांव में घुस जाते हैं, जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है और हाथी-मानव संघर्ष बढ़ता है। बिजली की लचर व्यवस्था जानलेवा साबित हो रही है।”

बैठक में विभाग को पहले फेज में कुकड़ू प्रखंड में नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की स्वीकृति देने पर सहमति बनी। साथ ही कई अहम मांगें रखी गईं,।
*ग्राफिक्स: बैठक में उठी प्रमुख मांगें*
1. खुले तारों को हटाकर एबी केबल लगाया जाए।
2. टूटे-फूटे खंभों को हटाकर नए खंभे लगाए जाएं।
3. आवश्यकता अनुसार गांवों में नए ट्रांसफार्मर लगाए जाएं।
4. गांवों में लाइनमैन की नियुक्ति की जाए।
5. बिजली मित्र द्वारा हर माह बिजली बिल स्लिप का वितरण हो।
6. फीडर में योग्य अनुभवी कर्मी नियमित बहाल किए जाएं।
7. आकस्मिक बिजली कटौती की सूचना के लिए मोबाइल ग्रुप बनाया जाए।
8. किसानों को रैयत जमीन पर नया बिजली कनेक्शन दिया जाए।
9. सहायक अभियंता/कनीय अभियंता नियमित क्षेत्र में मरम्मत कार्य का निरीक्षण करें।
10. बिजली तार की चपेट में आने से पालतू जानवरों की हुए मौत पर मुआवजा राशि शीघ्र भुगतान हो।
जिप उपाध्यक्ष ने कहा कि हाथी प्रभावित क्षेत्र होने के कारण रात्रि में बिजली कटौती बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। अंधेरे का फायदा उठाकर हाथियों के झुंड गांव में घुस जाते हैं, जिससे घर एवं फसल और जान-माल का नुकसान होता है।
बैठक में कार्यपालक अभियंता ने मांगों पर त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिया। पहले चरण में केबिलिंग और जर्जर खंभे बदलने का काम शुरू होगा।
कुकड़ू प्रखंड के ग्रामीण वर्षों से बिजली संकट और हाथियों के आतंक से जूझ रहे हैं। अब देखना होगा कि इस बैठक के बाद जमीनी स्तर पर कितनी तेजी से काम होता है और ग्रामीणों को 24 घंटे बिजली कब तक मिल पाती है।
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