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जेल से नई जिंदगी की ओर: NALSA की SPRUHA योजना के तहत 80 वर्षीय बंदी का DLSA सरायकेला ने कराया पुनर्वास

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Oct 8, 2026
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सरायकेला, 8 अक्टूबर 2026:

न्याय केवल न्यायालय तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंद और असहाय व्यक्तियों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना भी न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी भावना के साथ जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सरायकेला-खरसावां (DLSA) ने आज NALSA की SPRUHA योजना के तहत सरायकेला जेल के एक 80 वर्षीय वृद्ध बंदी के पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की।

यह कार्य झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (JHALSA), रांची के तत्वावधान में तथा DLSA के माननीय अध्यक्ष के कुशल मार्गदर्शन में किया गया। वृद्ध बंदी को सरायकेला स्थित वृद्धाश्रम में पुनर्वासित किया गया, जहां उन्हें आश्रय एवं आवश्यक देखभाल उपलब्ध हो सकेगी।

उक्त वृद्ध बंदी के मामले में DLSA ने प्रारंभ से ही विशेष संवेदनशीलता दिखाते हुए मामले की शुरुआत से लेकर अंतिम निर्णय तक निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई। उनके लिए Legal Aid Defence Counsel नियुक्त किया गया, जिसने पूरे मामले में उनका विधिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया।

वृद्ध बंदी के जीवन में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं था जो उनके मामले की पैरवी कर सके अथवा उनकी देखभाल और पुनर्वास की जिम्मेदारी उठा सके। ऐसी परिस्थिति में DLSA ने केवल उन्हें न्यायिक प्रक्रिया में विधिक सहायता ही नहीं दी, बल्कि मामले के अंतिम निर्णय के बाद उनके पुनर्वास की जिम्मेदारी भी निभाई।

DLSA की इस पहल से यह संदेश गया कि विधिक सेवा का उद्देश्य केवल न्यायालय में मुकदमे की पैरवी करना नहीं, बल्कि जरूरतमंद व्यक्ति को न्याय, गरिमा, संरक्षण और समाज में पुनर्स्थापना सुनिश्चित करना भी है।

इस अवसर पर DLSA सरायकेला-खरसावां ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि समाज के वृद्ध, असहाय एवं वंचित व्यक्तियों तक विधिक सहायता और सामाजिक पुनर्वास की सुविधाएं पहुंचाना विधिक सेवा संस्थाओं की प्राथमिक जिम्मेदारियों में से एक है।

यह पहल “Access to Justice for All” की भावना को साकार करने के साथ-साथ मानवीय गरिमा और सामाजिक न्याय के प्रति DLSA सरायकेला-खरसावां की प्रतिबद्धता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।


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