

नबीनगर से संदीप कुमार की रिपोर्ट

नवीनगर प्रखंड क्षेत्र मे अखंड सौभाग्य की कामना के लिए महिलाओं ने वट सावित्री की पूजा की। पूजा करने के बाद महिलाओं ने बरगद के पेड़ के चारों तरफ पति की रक्षा का प्रतीक रक्षा धागा बांधा । इसके बाद वहां पर बैठे ब्राह्मण द्वारा सुनाई जा रही सावित्री सत्यवान तथा भगवान यमराज की कथा का महात्म्य सुना। इस मौके पर शहर के बस स्टैंड,पंचदेव धाम,भवानों खाप सहित सभी जगह बरगद के पेड़ की महिलाएं पूजा करती देखी गईं।पति के दीर्घायु व सलामती की कामना करते हुए सुहागिन महिलाओं ने श्रद्धा व विधि विधान से वट वृक्ष की पूजा की।
महिलाएं पूरा श्रृंगार कर बरगद के पेड़ के नीचे इकट्ठा हुई व वट वृक्ष में कच्चा धागा लपेट कर पति के दीर्घायु, सुख व समृद्धि की कामना की।अहले सुबह से ही व्रतियों की भीड़ पूजा अर्चना के लिए जगह जगह उमड़ पड़ी ।इस दिन सुहाग की सुरक्षा के लिए बट सावित्री का पूजा अर्चना की जाती है।यह व्रत महिलाओं के लिए बेहद खास होता है।इस दिन माता सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और श्रद्धा से यमराज द्वारा अपने मृत पति सत्यवान के प्राण को वापस मांग ली थी।
इसलिए महिलाओं के लिए यह व्रत बेहद फलदाई माना जाता है।इस दिन महिलाएं सोलह शृंगार कर अपने पति कि लंबी उम्र के लिए बरगद के पेड़ की पूजा करते हैं। वही पुरोहित ने बताया कि बट का मतलब बरगद का पेड़ होता है।बरगद एक विशालकाय पेड़ होता है।
जिसमें अनेकों जटाये निकली होती है।धार्मिक मान्यता के अनुसार इस पेड़ के नीचे सावित्री ने अपने पति को यमराज से दोबारा प्राप्त की थी,जिस कारण सावित्री को देवी का रूप माना जाता है।हिंदू पुराण के मुताबिक बरगद के पेड़ में ब्रह्मा,विष्णु और महेश का वास होता है।मान्यता है कि ब्रह्मा बरगद की जड़ में विष्णु तना में तथा शिव ऊपरी भाग एवं सभी पत्तों में वास करते है।
इसी वजह से इस पेड़ के नीचे बैठकर पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।साथ ही वटवृक्ष के तना को कच्चे धागे से बांध कर महिलाएं परिक्रमा करती है। ज्येष्ठ अमावस्या तिथि को हिन्दू महिलाएं वट सावित्री का व्रत रखती हैं। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन व्रत रखकर वट वृक्ष के नीचे सावित्री, सत्यवान और यमराज की पूजा करने से पति की आयु लंबी होती है और संतान सुख प्राप्त होता है।
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