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सरायकेला :चांडिल-सुखसारी-जामडीह सड़क पर बड़ा सवाल – 42 करोड़ की योजना फिर भी अधूरी क्यों ।

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BySubhasish Kumar

Sep 4, 2026
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सरायकेला : पथ निर्माण विभाग, झारखंड सरकार द्वारा NH-32 (PHED मोड़ चांडिल) से सुखसारी होते हुए जामडीह तक (कुल लंबाई 12.432 किमी) चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य का शिलान्यास 22 फरवरी 2022 को सांसद संजय सेठ और ईचागढ़ विधायक सविता महतो के हाथों किया गया था। लागत लगभग 42-43 करोड़ बताई गई थी।
4 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी न तो सड़क बनी और न ही भू-अर्जन के बाद ग्रामीणों को मुआवजा मिला। ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों की योजना शुरू होते ही ठेकेदार काम छोड़कर चला गया।
*मुआवजा नोटिस के बाद भी भुगतान नहीं* जिला भू-अर्जन कार्यालय द्वारा ग्रामीणों को नोटिस दिया गया था। जैसे – भू-अर्जन वाद सं. DLA CASE NO-40/2019-20, मौजा-गुंडा, थाना नं-285, अंचल-नीमडीह, खाता नं-55, प्लॉट नं-3134, रकवा 0.007 एकड़ के लिए 15,037 रुपये मुआवजा निर्धारित किया गया था। रैयतों को 30/01/25 को दस्तावेज के साथ उपस्थित होने को कहा गया था।
इसी तरह नीमडीह प्रखंड के गुंडा, तिल्ला और चांडिल प्रखंड के रसुनिया, माझीडीह, सुखसारी के कई रैयतों को नोटिस मिला, लेकिन आज तक मुआवजा नहीं मिला।
हरी कृष्णा सिंह सरदार, गुंडा बिहार वन प्रबंधन संरक्षण समिति ने कहा –
“हम लोगों को नोटिस भी मिला है। दो-दो बार सर्वे भी हो चुके, परन्तु घर एवं जमीन का मुआवजा नहीं मिला। यह सड़क गुंडा बिहार, रसुनिया, माझीडीह, सुखसारी होते हुए NH-18 चांडिल को जोड़ती है। सड़क नहीं बनने से गुंडा, रसुनिया और तिल्ला पंचायत के लोगों को चांडिल रेलवे स्टेशन, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, अनुमंडल कार्यालय और न्यायालय जाने में भारी कठिनाई होती है। गुंडा बिहार से चांडिल बाजार जाने वाली सड़क रेलवे ट्रैक के पास पूरी तरह बदहाल है, पानी जमा है और गड्ढों में तब्दील हो चुकी है।”
सुरेश प्रसाद पारित, जामड़ीह स्थानीय रैयत ने कहा –
“यह सड़क तिल्ला पंचायत के जामडीह से सुखसारी PHED मोड़ तक बननी है। दोनों तरफ 25-25 फीट जमीन 58,000 रुपये डिसमिल की दर से अधिग्रहित की गई है, लेकिन मकान का मुआवजा अभी तक निर्धारित नहीं हुआ है। न भुगतान हो रहा है, न अधिग्रहण से मुक्त किया जा रहा है। समझ नहीं आ रहा मकान बनाएं या मरम्मत करें।”
“यह सड़क बनने से हम लोग गुंडा बिहार रेलवे स्टेशन, चांडिल अनुमंडल अस्पताल, कार्यालय, चांडिल डैम होते हुए रांची आसानी से जा सकेंगे। NH-33 पर मुखिया होटल तक पहुंचना आसान होगा और चांडिल-जामडीह फाटक के जाम से छुटकारा मिलेगा।”
“17 जनवरी 2026 को तिल्ला में विधायक मैडम अधिकारियों के साथ आई थीं। पूछने पर बताया गया कि रेलवे और फॉरेस्ट की जमीन के कारण विलंब हो रहा है। ठेकेदार त्रिवेणी इंजीकॉन प्रा. लि., बिष्टुपुर ने 2022 में कोरोना काल में सिर्फ 1 किमी काम किया – रसुनिया विद्यालय के पास थोड़ा चौड़ीकरण, गढ़वाल और दो-चार कलवर्ट – फिर कैंप खाली कर दिया। बोला जमीन नहीं मिली तो घर पर रोड कैसे बनाएं।”
*जनहित का सवाल : 2022 में शिलान्यास, 2026 तक अता-पता नहीं* ग्रामीण पूछ रहे हैं – इतनी बड़ी लगभग 12.5 किमी सड़क की राशि गई कहां? टेंडर लेने वाले ठेकेदार कहां गए? टेंडर पास करने वाले अधिकारी कहां हैं? इसका जवाब कौन देगा?
इस सड़क के बनने से तीन पंचायतों को लाभ होगा, दुकानें-हाट लगेंगे, जीविका बढ़ेगी और जाम से मुक्ति मिलेगी। गुंडा बिहार स्टेशन से रांची के लिए ट्रेन पकड़ना आसान होगा।
राकेश रंजन महतो, अध्यक्ष, विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन ने कहा –
“हैरानी की बात है कि रोज शिलान्यास की खबरें आती हैं। नारियल फोड़ा जाता है, पर्दा हटाया जाता है, लेकिन पर्दे के पीछे हकीकत यह है कि 22-02-2022 के बाद काम जस का तस पड़ा है। मेरे गांव रसुनिया की सड़क को खोदकर छोड़ दिया गया है। जब सड़क बनाने की बारी आती है, तब न ठेकेदार का पता चलता है, न विधायक का, न सांसद का।”
ग्रामीणों ने मांग की है कि यथाशीघ्र सड़क का निर्माण कराया जाए और रैयतों को उचित मुआवजा दिया जाए।
झारखंड पथ निर्माण विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार चांडिल P.H.E.D. मोड़ (NH-32) से जामडीह, सुखसारी होते हुए बनने वाली सड़क की कुल लंबाई 12.432 किमी है।
इसकी प्रशासनिक स्वीकृति ₹42.11 करोड़ की है और ₹29.44 करोड़ का एग्रीमेंट संवेदक Triveni Engicons Pvt. Ltd., जमशेदपुर के साथ 08.10.2021 को किया गया था। निर्धारित पूर्णता तिथि 07.08.2022 थी।
लेकिन सरकारी प्रगति रिपोर्ट में वित्तीय प्रगति मात्र 2% (₹8.21 करोड़) और भौतिक प्रगति 5% ही दर्ज है। विभाग ने इसे Delayed Project के रूप में दर्ज किया है।
*जनता के सवाल :*
1. जब पूर्णता तिथि 2022 थी, तो 2026 में भी सड़क पूरी क्यों नहीं हुई?
2. संवेदक को अब तक कितना भुगतान किया गया और ₹8.21 करोड़ किस कार्य में खर्च हुआ?
3. काम बंद होने की वास्तविक वजह क्या है – जमीन अधिग्रहण, फॉरेस्ट/रेलवे क्लीयरेंस या संवेदक की लापरवाही?
4. विभाग ने संवेदक के विरुद्ध क्या कार्रवाई की? क्या एग्रीमेंट रद्द कर री-टेंडर किया गया?
जनता को सिर्फ आश्वासन नहीं, पूरी जानकारी और सड़क चाहिए।

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