
नई दिल्ली। ताइवान ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ताइवान के राष्ट्रपति लाइ चिंग ते के बीच सौहार्दपूर्ण बातचीत पर चीन की नाराजगी पूरी तरह अनुचित है, क्योंकि धमकियों एवं डराने-धमकाने से दोस्ती कभी नहीं बढ़ती।

ताइवान के विदेश मंत्रालय ने ‘एक्स’ पर यह भी कहा कि ताइवान भारत के साथ पारस्परिक लाभ और साझा मूल्यों पर आधारित साझेदारी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने भी कहा कि इस तरह के बधाई संदेश राजनयिक कामकाज का सामान्य तरीका है।
गौरतलब है कि आम चुनावों में जीत हासिल करने पर प्रधानमंत्री मोदी को ताइवान के राष्ट्रपति लाइ ने बधाई संदेश भेजा था और भारत के साझेदारी बढ़ाने एवं व्यापार, तकनीक व अन्य क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करने की इच्छा जताई थी, ताकि हिंद प्रशांत क्षेत्र की शांति एवं समृद्धि में योगदान दिया जा सके।
जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति लाइ को धन्यवाद देते हुए पारस्परिक रूप से लाभकारी आर्थिक एवं तकनीकी साझेदारी की दिशा में काम करने के लिए संबंधों को घनिष्ठ बनाने की इच्छा जताई थी।
संदेशों के इसी आदान-प्रदान पर चीन ने आपत्ति व्यक्त की थी और दोहराया था कि ताइवान चीन का अभिन्न हिस्सा है।
साथ ही भारत को याद दिलाया था कि वह एक चीन के सिद्धांत को समर्थन देता रहा है, इसलिए उसे ताइवान की चालों में नहीं फंसना चाहिए।
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