
रिपोर्ट सत्येन्द्र यादव
कुल्टी, गौरंगों मंदिर बराकर के शताब्दी वर्ष के सप्ताहव्यापी कार्यक्रम को लेकर सोमवार को श्रीमद् जगतगुरु शंकराचार्य गोवर्धन मठ पीठाधीश्वर स्वामी श्री निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज ने हनुमान चढ़ाई स्थित केडी बंगलों पर कहा कि बच्चे को धर्म के लिये प्रेरित बचपन से ही करें।इसकी जिम्मेवारी बच्चें के मां पिता की है। यज्ञ ,दान,व्रत ,तप से आपका जीवन हितप्रद होगा। सनातन विधा से संस्कार होता है।उसका भी प्रभाव होता है। परिस्थिति जन्य संस्कार के द्वारा त्याज्य भी ग्राही बन जाता है। मातृ शक्ति का शिर्ष सुरक्षित रखे।बिना परिवार नियोजन एवं गर्भपात के जनसंख्या संतुलित रहे।यही अनुमोध विधा है। अमेरिका, जर्मनी,ब्रिटेन एवं फ्रांस में परंपरा से वर्णात्मक व्यवस्था लुफ्त है वहां वैकल्पिक वर्ण बनाने की व्यवस्था है। वैकल्पिक वर्णव्यवस्था से समय का अधिक उपयोग होगा।संस्कार का आदान नही होता,संतुलन बिगड़ जाता है।इन दृष्टियों से सिद्ध कोटि के मार्ग भी सिद्ध होता है।साध्य कोटि का महत्व भी सिद्ध होता है।किसी के दृश्य में धर्म का स्वभाव हो सकता है।फिर भी प्राप्त विवेक का अनादर विवेक का नाश कर देता है। एक ही परमात्मा ब्रह्मा,विष्णु,महेश सृष्टि दश में है कृति के निर्वाहन के लिये विष्णु,संभती या सांभर के लिये शिव एवं अनुग्रह के लिये गणपति है।उत्पादक,सांभर,पालक ,निग्रह,अनुग्रह ।पृय्वी उत्पति जल पादन अग्नि सांभर वायु निग्रह आकाश अनुग्रह है।मनुष्य जीवन मे चार सार को अपनाये सच्चिदानंद सद्भावपूर्ण व्यवहार,स्मरण एवं सज्जनता। वही राजनीतिक में धर्म के हस्तक्षेप को लेकर कहा कि धर्म के सीमा को अतिक्रमण करके राजनीतिक करना नजे ही संभव है ना कि क्रियान्वित।सत्ता लोलुपता , दूरदर्शिता से मुफ्त राजनीतिक होना चाहिये।पर्यावरण के अनिरुद्ध विकास हो।सनातन के वर्ण व्यवस्था के बिना कोई व्यवस्था नही चल सकती है। हिन्दू राष्ट्र की बात पर कहा कि हिन्दू राष्ट्र भी सनातन सिद्धांत है।दार्शनिक ,सांस्कृतिक, सुरक्षित, सुसज्जित आधार पर हिन्दू राष्ट्र की परिकल्पना है।

इस अवसर पर साधु हरेकृष्ण बाबा, कथा वाचक विवेक मिश्र, विधायक डाक्टर अजय पोद्दार, हराधन मंडल, अजित मडंल, रोबिन लायक, पिंकी पाल, अर्जुन अग्रवाल, शंकर शर्मा, श्रीराम सिंह समेत बड़ी संख्या में महिलाए भी उपस्थित थी।

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