
धनबाद—-निरसा। तिलकुट की दुकान सज गई है लोग दूर-दूर से आकर तिलकुट खरीद रहे हैं गया बिहार से आए कारीगर भी दिन-रात तिलकुट बनाने में जुटे हैं।

दिसम्बर माह के अंतिम सप्ताह आते ही तिलकुट की खुशबू से बाजार महकने लगती है चौक चौराहों पर तिलकुट से जुड़े व्यापार करने में लोग जुड़ जाते हैं निरसा, चिरकुंडा एवं कुमारधुबी में भी तिलकुट को लेकर बाजार सज गया है दो दिन बाद मकर संक्रांति का त्यौहार है जिसे लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है दूर दराज क्षेत्रों से रहने वाले लोग तिलकुट की खरीदने के लिए दुकानों पर पहुंच रहे हैं कोई 1 किलो कोई 2 किलो एवं कोई 4 किलो तिलकुट खरीद रहे हैं।

मकर संक्रांति के मौके पर तिलकुट की बढ़ती मांग को देखते हुए व्यापारी भी तिलकुट बनाने में जुट गए हैं निरसा कुमारधुबी एवं चिरकुंडा के आसपास के बाजारों में विभिन्न तरह के तिलकुट मिल रहे हैं कोई गुड का तिलकुट की फरमाइश कर रहे हैं तो कोई चीनी से बने तिलकुट की फरमाइश कर रहे हैं तिलकुट व्यापारी ने बताया कि इस कार्य में पिछले 20 वर्षों से लगे हुए हैं।
गौरतलब है कि मकर संक्रांति के मौके पर तिलकुट की मांग चरम पर होती है ऐसे में गया से आए कारीगर को भी तिलकुट बनाने का काम मिलता है गया से आए तिलकुट बनाने वाले कई कारीगर मकर संक्रांति के एक माह पूर्व से ही उन्हें व्यापार मिल जाता है क्योंकि तिलकुट बनाने में कारीगरों की आवश्यकता होती है ऐसे में तिलकुट से जुड़े व्यापार करने वाले व्यवसाय ग्राहकों को पूरा करने के लिए बाहर से कारीगरों को बुलाते हैं।
वैसे भी तिल ठंड के मौसम में लोगों को गर्मी का अहसास देती है सर्दियों में मकर संक्रांति के मौके पर तिल खाने की परंपरा है इसी परंपरा के तहत प्रति वर्ष मकान संक्रांति से पहले लोग तिल से बने मिठाइयां खरीदते हैं और मकर संक्रांति के दिन अपने पूरे परिवार के साथ तिल खाकर पर्व मानते हैं।
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