
नईदिल्ली : हिंसा की आग में झुलस रहे मणिपुर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शांति बहाली की कोशिशों में जुटे हुए हैं आज गृहमंत्री इंफाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस की वहां के हालात के बारे में जानकारी दी। अमित शाह ने कहा कि मणिपुर हाईकोर्ट के एक जल्दबाज फैसले के कारण यहां पर जातीय हिंसा और दो ग्रुप के बीच में हिंसा की शुरुआत हुई। उन्होंने इसके पीछे साजिश की भी आशंका जताते हुए कहा कि CBI इस तरह के 6 मामलों की जांच करेगी। भारत सरकार हिंसा, हिंसा के कारण और हिंसा में किसकी ज़िम्मेदारी है, इन सभी चीजों की जांच के लिए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस स्तर के रिटायर्ड न्यायाधीश की अध्यक्षता में आयोग गठित करके जांच कराएगी।

राहत शिविरों का दौरा

उन्होंने बुधवार को मोरेह और भारत-म्यांमार सीमा से जुड़े कांगपोकपी का दौरा किया। इस दौरान कुकी और मैतेई दोनों ही समुदाय के लोगों ने उनका स्वागत किया। हिंसा प्रभावित कांगपोकपी में सैकड़ों की संख्या में कुकी आदिवासियों ने तिरंगा हाथ में लेकर उनका स्वागत किया। गांव के लोगों ने कहा कि हम सरकार की शांति स्थापित करने में हर तरह की मदद करेंगे। गृहमंत्री ने दोनों ही समुदायों के राहत शिविरों में जाकर पीड़ितों से मुलाकात की और उनसे वादा किया कि जल्द ही उन्हें वापस अपने घर लौट पाएंगे। इसके अलावा इमरजेंसी के लिए हेलिकॉप्टर की सेवा भी उपलब्ध करवाई जाएगी।
शांति के प्रयास
अमित शाह ने बुधवार को सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठक में कहा कि उपद्रवियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है। मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह ने भी लोगों से अपील की है कि असम राइफल्स और अन्य सुरक्षाबलों से छीने हुए हथियार वे वापस कर दें। हालांकि अमित शाह की मौजूदगी के बावजूद पहाड़ी इलाकों में हिंसा की कई घटनाएं हुईं। सुरक्षाबलों ने संदिग्ध लोगों की धरपकड़ की कोशिश की तो फायरिंग होने लगी। क्रॉसफायरिंग में दो लोग घायल हुए हैं।
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