• Sat. Jun 13th, 2026

Saraikela : रजो संक्रांति: जहां धरती और नारीत्व दोनों का होता है उत्सव* *झारखंड के ओडिया-बहुल क्षेत्रों में मानसून के स्वागत का अनूठा पर्व, तीन दिन महिलाओं को मिलता है पूर्ण विश्राम

Subhasish Kumar's avatar

BySubhasish Kumar

Jun 13, 2026
crescent ad
सरायकेला:  ओडिशा की सीमाओं से सटे झारखंड के पूरे कोल्हान में जैसे ओडिया-बहुल क्षेत्रों में रविवार को *रजो संक्रांति* की रौनक देखने को मिलेगा। मानसून के आगमन का प्रतीक यह त्योहार प्रकृति, कृषि और नारीत्व के सम्मान का अद्भुत संगम है।
खास बात यह है कि यह पर्व नारी सशक्तिकरण का अनूठा उदाहरण है, जहां तीन दिन तक महिलाएं और लड़कियां घर के सभी कामों से पूरी तरह मुक्त रहती हैं।
*चार दिन, चार रस्में: कैसे करें मनती है रजो संक्रांति?*
*1. सजा-बजा – तैयारी का दिन:* त्योहार के पहले दिन घर-आंगन और रसोई की विशेष साफ-सफाई होती है। महिलाएं और लड़कियां हाथ-पैरों में आलता लगाकर, नए वस्त्र पहनकर खुद को सजाती हैं।
*2. पूर्ण विश्राम – काम से ब्रेक:* अगले तीन दिन तक महिलाएं चूल्हा नहीं जलातीं और न ही घर का कोई काम करती हैं। खाना बनाने से लेकर घर संभालने तक की पूरी जिम्मेदारी पुरुष उठाते हैं। यह परंपरा महिलाओं के श्रम को सम्मान देने का प्रतीक है।
*3. झूला, गीत और पकवान:* गांव के आम-बरगद के पेड़ों पर _डांडी डोली_ और _चर्खी डोली_ जैसे पारंपरिक झूले डाले जाते हैं। सजी-धजी महिलाएं और लड़कियां झूला झूलते हुए पारंपरिक _‘रजो गीत’_ गाती हैं। घर-घर में चावल के आटे, नारियल, गुड़ और घी से बना खास *‘पोड़ा पीठा’* के साथ चकुली और अरिशा जैसे व्यंजन बनाए और बांटे जाते हैं।
*4. वसुमती स्नान – धरती का श्रृंगार:* त्योहार के अंतिम दिन _वसुमती स्नान_ होता है। धरती माता के प्रतीक सिल-बट्टे को हल्दी के लेप से स्नान कराया जाता है। उसे फूल, सिंदूर से सजाकर मौसमी फल अर्पित किए जाते हैं।
*क्या है रजो का महत्व?*
*1. मासिक धर्म का उत्सव:* मान्यता है कि इन तीन दिनों में _‘भूमि देवी’_ रजस्वला होती हैं। मासिक धर्म को अपवित्र मानने के बजाय यहां इसे धरती की प्रजनन क्षमता और सृजन शक्ति के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। नारीत्व को प्रकृति से जोड़कर सम्मान दिया जाता है।
*2. धरती को आराम:* परंपरा के अनुसार मानसून की पहली बारिश से पहले धरती को आराम की जरूरत होती है। इसलिए इन दिनों खेतों की जुताई, मिट्टी खोदना और नंगे पैर जमीन पर चलना वर्जित होता है।
*3. मानसून का स्वागत:* यह विशुद्ध कृषि पर्व है। यह बताता है कि अब ग्रीष्म की तपती धरती मानसून की फुहारों से भीगकर नई फसल उगाने के लिए तैयार है।
सरायकेला के किसानों का कहना है की रजो संक्रांति हमें सिखाती है की प्रकृति और नारी दोनों सृजन का आधार है हमें उनका सम्मान करना चाहिए।

There is no ads to display, Please add some
Post Disclaimer

स्पष्टीकरण : यह अंतर्कथा पोर्टल की ऑटोमेटेड न्यूज़ फीड है और इसे अंतर्कथा डॉट कॉम की टीम ने सम्पादित नहीं किया है
Disclaimer :- This is an automated news feed of Antarkatha News Portal. It has not been edited by the Team of Antarkatha.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *