
दीपावली बीतने के बाद अब लोक आस्था का महापर्व छठ भी बिना पानी के मनाने की नौबत आ गई है। बीते 5 अक्टूबर से पीट वाटर सप्लाई पूरी तरह बंद होने के कारण, लगातार 20 दिन से क्षेत्र की करीब 25 हजार की आबादी पानी के भीषण संकट से जूझ रही है।
प्रबंधन की लापरवाही पर सवाल

स्थानीय लोगों में कोलियरी प्रबंधन के खिलाफ भारी नाराजगी है। निवासियों ने आरोप लगाया कि यह संकट पंप की मरम्मत में प्रबंधन की घोर लापरवाही के कारण पैदा हुआ। मरम्मत के लिए झरिया भेजी गई सबमर्सिबल मोटर जब वापस लौटी और उसे बोरहोल में डाला जा रहा था, तभी कपलिंग के पास से वेल्डिंग टूट गई, और पंप झूल गया।

लोगों ने सवाल उठाया कि मरम्मत के बाद प्रबंधन द्वारा पंप की जांच क्यों नहीं की गई, और झरिया की कंपनी ने कैसा काम किया। सौभाग्य से समय रहते पंप को ऊपर निकाल लिया गया, अन्यथा यह बोरहोल में गिर जाता तो जलापूर्ति महीनों तक बंद रह सकती थी।
वैकल्पिक व्यवस्था की मांग
क्षेत्रवासियों का कहना है कि वे वर्षों से दूसरा सबमर्सिबल पंप रखने और टैंकर से वैकल्पिक पानी आपूर्ति की मांग करते रहे हैं, लेकिन प्रबंधन की हठधर्मिता के चलते आज तक कोई व्यवस्था नहीं की गई। पूरी कोलियरी आबादी इसी एक सबमर्सिबल पर निर्भर है। छठ पर्व के निकट आने से पानी की कमी के कारण घरों की साफ-सफाई और पूजा की तैयारी भी ठप हो गई है, जिससे लोगों में गहरी चिंता है।
आंदोलन की चेतावनी
प्रबंधन की इस नाकामी पर आक्रोशित लोगों ने कड़ी चेतावनी दी है कि अगर शीघ्र जलापूर्ति बहाल नहीं की गई, तो लोयाबाद कारखाना स्थित डीजल पंप सप्लाई को अनिश्चितकाल के लिए ठप कर दिया जाएगा। लोगों का कहना है कि कोयला निकासी की बात आते ही प्रबंधन तुरंत हर व्यवस्था करता है, लेकिन ग्रामीणों के साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है।
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