
रिपोर्ट: सन्नी शर्मा


धनबाद: कहते हैं अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून के हाथ उसकी गर्दन तक पहुँच ही जाते हैं। बिहार के कैमूर में 2014 में हुई उस फिल्मी बैंक डकैती को कौन भूल सकता है? पूरे 12 साल तक ‘पकड़ सको तो पकड़ लो’ का खेल खेलने वाले एक मास्टरमाइंड का खेल अब खत्म हो गया है। सुदामडीह के मोहलबनी में चैन की बंसी बजा रहे संतोष सिंह को पुलिस ने धर दबोचा है।
क्या थी वो सनसनीखेज वारदात?
तारीख थी 20 जनवरी 2014 जगह- चेहरिया गांव स्थित दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक। नजारा किसी हॉलीवुड की ‘मनी हाइस्ट’ जैसा था। 7 से 8 नकाबपोश अपराधी फिल्मी स्टाइल में बैंक में घुसे। बंदूक की नोक पर बैंक कैशियर और ग्राहकों को स्टैच्यू बना दिया गया। अपराधी बैंक से 56 लाख रुपये और ग्राहकों की जेब से 57 हजार रुपये लेकर रफूचक्कर हो गए।
इस्तेहार चिपकाने गए थे, दूल्हा मिल गया!
बिहार पुलिस के सब-इंस्पेक्टर बिजेंद्र कुमार सुदामडीह पुलिस के साथ आरोपी संतोष सिंह के घर ‘इस्तेहार'(भगोड़ा घोषित करने का नोटिस) चिपकाने पहुंचे थे। पुलिस को लगा था कि साहब हमेशा की तरह फरार होंगे, लेकिन किस्मत देखिए! संतोष सिंह घर पर ही मिल गए।
“साहब ने सोचा था मामला ठंडा पड़ गया है, लेकिन बिहार पुलिस की याददाश्त बड़ी तेज निकली!”
अब तक का लेखा-जोखा:
इस चर्चित डकैती कांड में पुलिस की फाइल अब धीरे-धीरे बंद होने की ओर है। पुलिस के मुताबिक, इस गैंग के 3 से 4 अपराधियों की मौत हो चुकी है। दो आरोपी पहले ही सलाखों के पीछे ‘चक्की’ पीस रहे हैं। संतोष सिंह लंबे समय से चकमा दे रहा था, पर इस बार उसकी ‘सेटिंग’ फेल हो गई।
फिलहाल, बिहार पुलिस संतोष सिंह को ट्रांजिट रिमांड पर लेकर कैमूर ले जाने की तैयारी में है। 12 साल पहले बैंक से उड़ाए गए उन लाखों रुपयों का हिसाब अब हवालात की सलाखों के पीछे होगा।
गुनाह की उम्र कितनी भी लंबी हो, पुलिस की डायरी कभी बंद नहीं होती!
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