
सरायकेला -जिला परिषद की बहुप्रतीक्षित बैठक बुधवार को भारी हंगामे और तीखी नोकझोंक के बीच स्थगित हो गई। जिला परिषद अध्यक्ष श्री सोनाराम बोदरा की अध्यक्षता में शुरू हुई इस बैठक में विकास योजनाओं के फंड बंटवारे में पारदर्शिता की कमी और अधिकारियों की लापरवाही पर सदन में जमकर बवाल हुआ। हालात इतने बेकाबू हो गए कि अध्यक्ष को बैठक बीच में ही रोकने का निर्णय लेना पड़ा।


बैठक शुरू होते ही सदस्यों ने फंड वितरण की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। सदस्यों का कहना था कि कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में ही विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि कई ग्रामीण क्षेत्र बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। “भेदभाव पूर्ण रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा,” कहते हुए सदस्यों ने पारदर्शिता की मांग की।
‘इलाज कम, रेफर ज्यादा’
बैठक में जिले की चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था पर अधिकारियों को जमकर घेरा गया। खासकर सदर अस्पताल सरायकेला, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और उप-स्वास्थ्य केंद्रों की कार्यप्रणाली पर सदस्यों ने नाराजगी जताई। सदस्यों ने आरोप लगाया कि सदर अस्पताल केवल ‘रेफरल सेंटर’ बनकर रह गया है। मामुली बीमारियों के लिए भी मरीजों को जमशेदपुर भेज दिया जाता है।
सदर अस्पताल के उपाध्यक्ष नवल प्रसाद चौधरी को जनप्रतिनिधियों के कड़े सवालों और आरोपों का सामना करना पड़ा। अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की गैर-मौजूदगी को लेकर सदन में काफी रोष देखा गया।
“बैठक औपचारिकता नहीं, समाधान का मंच है”
जिला परिषद अध्यक्ष सोनाराम बोदरा ने विभागों के पदाधिकारियों द्वारा अधूरे दस्तावेजों के साथ आने पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना तैयारी जनहित के खिलाफ है।
“अगली बैठक में अधिकारियों को पूरी तैयारी और पारदर्शी रिपोर्ट के साथ आना होगा। फंड का समान वितरण हमारी प्राथमिकता है और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” > — सोनाराम बोदरा, अध्यक्ष, जिला परिषद
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