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सरायकेला : राष्ट्रपति पुरस्कार की दौड़ में चांडिल डैम, 600 MW फ्लोटिंग सोलर से रचेगा इतिहास

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Sep 23, 2026
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सरायकेला :चांडिल स्थित सुवर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना के लिए गौरव का क्षण है। झारखंड के 67 डैमों में से राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए एकमात्र चांडिल डैम को नामित किया गया है।

 

परियोजना के कार्यपालक अभियंता संजय कुमार ने इस उपलब्धि की पुष्टि करते हुए बताया कि पुरस्कार के लिए जरूरी सभी तकनीकी दस्तावेज, सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट और जन-कल्याण से जुड़ी जानकारियां ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड कर दी गई हैं। अब भारत सरकार द्वारा गठित विशेषज्ञ जूरी टीम इसकी स्क्रीनिंग और अंतिम मूल्यांकन करेगी।

 

*67 डैमों में सबसे अव्वल क्यों चांडिल?*

 

कार्यपालक अभियंता के मुताबिक झारखंड में कुल 67 डैम हैं, जिनमें 58 पूर्ण निर्मित, 5 निर्माणाधीन, 3 पेयजल एवं स्वच्छता विभाग और 1 बिजली बोर्ड के अधीन है। इन सभी के बीच केवल चांडिल डैम का चयन इसकी बहुआयामी उपयोगिता को दर्शाता है।

 

उन्होंने बताया कि चयन के मुख्य मानक हैं –

1. *सुरक्षा मानक :* डैम की संरचनात्मक मजबूती और समय-समय पर किया गया मेंटेनेंस

2. *बहुउद्देशीय उपयोग :* सिंचाई, पेयजल आपूर्ति, बाढ़ नियंत्रण और अब ऊर्जा उत्पादन

3. *पुनर्वास और जन-कल्याण :* विस्थापितों के लिए किए गए कार्य

 

*600 MW फ्लोटिंग सोलर से बदलेगी तस्वीर*

 

चांडिल डैम अब सिर्फ जल भंडारण तक सीमित नहीं रहेगा। यहां 600 मेगावाट क्षमता का फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट प्रस्तावित है। यह देश के सबसे बड़े फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स में से एक होगा। डैम की विशाल जलराशि पर तैरते सोलर पैनल लगाए जाएंगे, जिससे जमीन की जरूरत नहीं होगी और पानी के वाष्पीकरण में भी कमी आएगी।

 

अभियंता संजय कुमार ने कहा, “यह प्रोजेक्ट अपने आप में कीर्तिमान है। कई बड़े थर्मल प्रोजेक्ट भी इसकी क्षमता के सामने छोटे पड़ जाएंगे। इससे झारखंड को स्वच्छ और सस्ती बिजली मिलेगी।”

 

यह नामांकन सिर्फ एक पुरस्कार की दौड़ नहीं, बल्कि पिछड़े माने जाने वाले कोल्हान क्षेत्र के विकास और यहां के लोगों के दशकों के संघर्ष को राष्ट्रीय पहचान दिलाने जैसा है। अगर चांडिल डैम को यह पुरस्कार मिलता है तो यह झारखंड के जल संसाधन के इतिहास में एक नया अध्याय होगा।


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