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सबाल (SABAL) ने ‘इंटरनेशनल साइन लैंग्वेज डे’ सेलिब्रेशन पर इंडियन साइन लैंग्वेज के बारे में जागरूकता बढ़ाने का काम किया।

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Sep 23, 2026
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जमशेदपुर । इंटरनेशनल डे ऑफ़ साइन लैंग्वेजेज़ (अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस) के मौके पर, टाटा स्टील फ़ाउंडेशन के दिव्यांगों को शामिल करने वाले प्रोग्राम ‘सबाल’ (SABAL) ने जमशेदपुर में कई कार्यक्रम आयोजित किए। इन कार्यक्रमों का मकसद इंडियन साइन लैंग्वेज (ISL) को बढ़ावा देना, बधिर समुदाय की आवाज़ को बुलंद करना और सुलभ बातचीत को एक बुनियादी अधिकार के तौर पर बढ़ावा देना था। यह जश्न एक महीने तक चलने वाले उस अभियान का हिस्सा है जो इंडियन साइन लैंग्वेज के बारे में जागरूकता फैलाने और सुनने में अक्षम लोगों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करने के लिए चलाया जा रहा है।

23 सितंबर को ‘सबाल’ ने जमशेदपुर के साकची स्थित सबाल सेंटर में बधिर समुदाय के साथ एक इंटरैक्टिव सेशन (बातचीत का सत्र) आयोजित किया। इस कार्यक्रम में बधिर समुदाय के सदस्य, शिक्षण संस्थान और सिविल सोसाइटी के लोग एक साथ शामिल हुए। इस कार्यक्रम में पैनल चर्चा, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, भारतीय सांकेतिक भाषा का प्रदर्शन, बधिर समुदाय के सफल लोगों का सम्मान और मीडिया व समुदाय के हितधारकों के साथ बातचीत शामिल थी।

सुबह के सत्र में, जमशेदपुर में सुनने में अक्षम लोगों की आकांक्षाओं, चुनौतियों, अधिकारों, शिक्षा और कौशल विकास के माहौल पर पैनल चर्चा हुई। बधिर संघों (समीरनलाल, निशा लाल, दिलीप और डीएन झा) और शिक्षण संस्थानों में कार्मेल बाल विहार, सिद्धेश्वर स्कूल और आशाकिरण के प्रतिनिधि और सुनने में अक्षम लोगों ने समान भागीदारी और अवसरों का समर्थन करने वाला माहौल बनाने के बारे में अपने अनुभव और विचार साझा किए। इस कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, छात्रों द्वारा कहानी सुनाने का कार्यक्रम, बेसिक इंडियन साइन लैंग्वेज पर एक सेशन और ISL गाने की प्रस्तुति भी शामिल थी। दोपहर के सेशन में बधिर समुदाय की प्रेरणादायक उपलब्धियों को सम्मान समारोह के ज़रिए उजागर किया गया, जिसमें खेल (सोनी और संजय), शिक्षा (बिस्वजीत लाहा, स्वीटी, ईशा कुमारी गुप्ता), रोज़गार (अमित और जागृति) और डांस (नाज़िया बानो) में बेहतरीन काम करने वालों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर बोलते हुए सबाल और स्पोर्ट्स में स्किल डेवलपमेंट के हेड, कैप्टन अमिताभ ने ज़ोर दिया कि “इंडियन साइन लैंग्वेज (ISL) सिर्फ़ बातचीत का ज़रिया नहीं है, बल्कि एक ऐसी भाषा है जो पहचान, संस्कृति और समुदाय को दर्शाती है। परिवारों, शिक्षकों, नौकरी देने वालों, सर्विस देने वालों और पूरे समाज द्वारा ISL के बारे में ज़्यादा जानकारी रखने और इसे अपनाने से बधिर लोगों के लिए पहुँच और समावेशन (inclusion) को काफ़ी बेहतर बनाया जा सकता है।” सबाल (SABAL) के ज़रिए, टाटा स्टील फ़ाउंडेशन बधिर समुदाय के लिए मौके बढ़ाने पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है। इसके लिए वे ISL के बारे में जागरूकता फैला रहे हैं, बेसिक ISL ट्रेनिंग दे रहे हैं, शिक्षा में मदद कर रहे हैं, स्पोर्ट्स से जुड़ी पहल को बढ़ावा दे रहे हैं और भागीदारी व नेतृत्व के लिए मंच तैयार कर रहे हैं। यह प्रोग्राम आवासीय शिक्षा के ज़रिए बधिर छात्रों की भी मदद करता है। यह संस्था आवासीय शिक्षा के मौकों के ज़रिए काम करती है और झारखंड और ओडिशा के ग्रामीण इलाकों में जागरूकता फैलाने की कोशिशें करती है।

यह आयोजन ‘इंटरनेशनल डे ऑफ़ साइन लैंग्वेजेज़’ (साइन भाषा का अंतर्राष्ट्रीय दिवस) और ‘इंटरनेशनल वीक ऑफ़ डेफ पीपल’ (बधिर लोगों का अंतर्राष्ट्रीय सप्ताह) के वैश्विक कार्यक्रमों से जुड़ा है। इस साल का विषय, “बधिर लोगों के मानवाधिकारों की घोषणा,” साइन भाषा के अधिकारों, सुलभता, समावेशी शिक्षा और समाज में बधिर लोगों की पूरी भागीदारी के महत्व को और मज़बूत करता है। SABAL ने एक ऐसा समावेशी माहौल बनाने के अपने संकल्प को दोहराया जहाँ बातचीत की रुकावटें भागीदारी, सीखने, रोज़गार या नेतृत्व में बाधा न बनें। यह पहल ऐसे समाज के लिए काम करती है जहाँ रोज़मर्रा की ज़िंदगी में हर चीज़ तक पहुँच (एक्सेसिबिलिटी) आसान हो और जहाँ हर व्यक्ति, चाहे उसे कोई भी विकलांगता हो, समाज में योगदान दे सके और तरक्की कर सके। SABAL के बारे में हम कह सकते हैं कि टाटा स्टील फ़ाउंडेशन का विकलांग लोगों को समाज में शामिल करने वाला यह एक प्रोग्राम है, जिसे 2017 में नोआमुंडी में शुरू किया गया था। यह प्रोग्राम झारखंड और ओडिशा में विकलांग लोगों के अधिकारों, शिक्षा, कौशल विकास, आजीविका, खेल, एक्सेसिबिलिटी और समुदाय की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए काम करता है, जिसमें ग्रामीण समुदायों पर खास ध्यान दिया जाता है। SABAL का मकसद विकलांग लोगों को समाज में शामिल करने की सोच को रोज़मर्रा की हकीकत में बदलना है। इसके लिए ऐसे मौके बनाए जाते हैं जिनसे वे अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल कर सकें।


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