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मुकुंदा में ओबी डंपिंग से खेतों में जलजमाव, ग्रामीणों की परेशानी सुनने पहुंचे सिंदरी विधायक चन्द्रदेव महतो; समाधान न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी

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Oct 31, 2026
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मुकुंदा/सिंदरी: मुकुंदा में जमीन अधिग्रहण के बाद हो रही निरंतर ओबी (ओवरबर्डन) डंपिंग के कारण आसपास के खेतों में जलजमाव की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। डंपिंग की वजह से खेतों से पानी की निकासी का प्राकृतिक रास्ता पूरी तरह बंद हो चुका है, जिसके परिणामस्वरूप स्थानीय ग्रामीण इस वर्ष धान की फसल नहीं लगा पाए। यदि यही स्थिति रही, तो आने वाले वर्षों में भी यहाँ खेती करना पूरी तरह असंभव हो जाएगा।

इस गंभीर संकट को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने सिंदरी विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक माननीय चन्द्रदेव महतो जी को अपनी समस्याओं से अवगत कराया। ग्रामीणों की शिकायत और आमंत्रण पर मुकुंदा पंचायत भवन में एक विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में विशेष रूप से उपस्थित होकर विधायक चन्द्रदेव महतो जी ने ग्रामीणों से एक-एक कर उनकी समस्याएं सुनीं।

बैठक के दौरान ग्रामीणों ने मुख्य रूप से तीन बड़ी समस्याओं को विधायक के समक्ष रखा

ओबी डंपिंग के कारण खेतों में हो रहा भारी जलजमाव।

पानी की निकासी का मार्ग पूरी तरह बाधित होना।

जमीन अधिग्रहण किए जाने के बावजूद बीसीसीएल (BCCL) प्रबंधन द्वारा कई रैयतों को अब तक मुआवजा राशि का भुगतान न किया जाना।

ग्रामीणों की शिकायत सुनने के बाद विधायक माननीय चन्द्रदेव महतो जी ने स्वयं ओबी डंपिंग स्थल का दौरा किया और प्रभावित खेतों की स्थिति का जमीनी जायजा लिया। खेतों की बदहाली और पानी का ठहराव देखकर विधायक ने गहरी चिंता और नाराजगी व्यक्त की।

मौके पर ग्रामीणों को संबोधित करते हुए विधायक चन्द्रदेव महतो ने कहा, “ग्रामीणों की समस्याएं बेहद गंभीर हैं और इस पूरे मामले को लेकर बहुत जल्द बीसीसीएल प्रबंधन के उच्चाधिकारियों के साथ वार्ता की जाएगी। प्रबंधन से दो टूक शब्दों में खेतों से पानी की तत्काल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने और रैयतों के लंबित मुआवजे का अविलंब भुगतान करने की मांग की जाएगी।”

विधायक जी ने बीसीसीएल प्रबंधन को कड़ा संदेश देते हुए स्पष्ट किया कि ग्रामीणों के हक, हकूक और अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि बीसीसीएल प्रबंधन बातचीत के माध्यम से समय रहते इस समस्या का न्यायसंगत समाधान नहीं करता है, तो ग्रामीणों के हितों की रक्षा के लिए वे स्वयं सड़क पर उतरेंगे और प्रबंधन के खिलाफ एक उग्र आंदोलन का शंखनाद किया जाएगा।

इस बैठक और निरीक्षण के दौरान भारी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, रैयत और पंचायत के जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।


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