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नबीनगर में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के आगमन की चर्चा तेज, प्रस्तावित आयोजन स्थल का हुआ निरीक्षण

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Oct 10, 2026
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औरंगाबाद से अविनाश कुमार की रिपोर्ट

 

बिहार के औरंगाबाद जिले के नबीनगर में बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर पंडित श्री धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी के संभावित आगमन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। उनके प्रस्तावित कथा एवं दिव्य दरबार के आयोजन को लेकर क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का माहौल बनने लगा है। इसी क्रम में आयोजन के लिए प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया गया। इस दौरान पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह एवं पूर्व चेयरमैन प्रतिनिधि मुकेश कुमार सिंह ने मौके पर पहुंचकर स्थल की स्थिति का जायजा लिया।

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी के संभावित आगमन की चर्चा से नबीनगर सहित आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में उत्सुकता देखी जा रही है।

प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, 27 जनवरी 2027 को कलश स्थापना का कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। इसके बाद 28 जनवरी से 30 जनवरी 2027 तक कथा एवं दिव्य दरबार का आयोजन प्रस्तावित है। इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर तैयारियों, आयोजन स्थल की उपयुक्तता और आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा की जा रही है।

पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह ने लिया स्थल का जायजा

प्रस्तावित आयोजन स्थल के निरीक्षण के दौरान पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह एवं पूर्व चेयरमैन प्रतिनिधि मुकेश कुमार सिंह ने स्थल की स्थिति का जायजा लिया। मौके पर मौजूद लोगों के बीच प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर चर्चा हुई। आयोजन की संभावनाओं और स्थल की उपयुक्तता को ध्यान में रखते हुए विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया।

निरीक्षण के दौरान कई गणमान्य लोग रहे मौजूद

इस अवसर पर राबिंदर शर्मा, अक्षय पांडेय, उदय प्रताप सिंह, शिवपूजन सिंह, लखन सिंह, संजय सिंह, गोलू कुमार, धनंजय सिंह एवं सुरेश सोनी सहित कई अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने प्रस्तावित आयोजन को लेकर चर्चा की और स्थल का निरीक्षण किया।

धार्मिक आयोजन से नबीनगर को मिल सकती है व्यापक पहचान

नबीनगर ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व के लिए जाना जाता है। ऐसे में यदि यहां पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी की कथा एवं दिव्य दरबार का आयोजन होता है, तो यह क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर साबित हो सकता है। इससे न केवल श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने की संभावना है, बल्कि स्थानीय स्तर पर धार्मिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।


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