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जनसंख्या दिवस पर अल-इकरा कॉलेज में नाटक, निबंध व पोस्टर प्रतियोगिता से फैलाया गया जागरूकता का संदेश

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Jul 11, 2026
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बरियो, गोविंदपुर (धनबाद), 11 जुलाई।

अंतर्राष्ट्रीय जनसंख्या दिवस के अवसर पर अल-इकरा टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, बरियो, गोविंदपुर, धनबाद में “जनसंख्या, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं पर्यावरण” विषय पर एक भव्य एवं जागरूकतापरक कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं समाज के बीच बढ़ती जनसंख्या, स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों, शिक्षा के महत्व तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का प्रसार करना था। पूरे कार्यक्रम में महाविद्यालय के सभी शिक्षकगण, शिक्षकेत्तर कर्मचारी एवं सभी प्रशिक्षु छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का वातावरण ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना से परिपूर्ण रहा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य मो. डॉ. शमीम अहमद ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि प्रत्येक वर्ष 11 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय जनसंख्या दिवस मनाने का उद्देश्य केवल बढ़ती जनसंख्या पर चिंता व्यक्त करना नहीं है, बल्कि जनसंख्या, स्वास्थ्य, शिक्षा, लैंगिक समानता, महिला सशक्तिकरण तथा पर्यावरण संरक्षण के बीच गहरे संबंध को समझना भी है। उन्होंने कहा कि यदि जनसंख्या वृद्धि नियंत्रित एवं संतुलित होगी, तभी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ, पर्याप्त प्राकृतिक संसाधन तथा स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकेगा। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे स्वयं जागरूक बनें तथा समाज में भी जनसंख्या संतुलन, स्वच्छता, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश पहुँचाएँ। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य मो. डॉ. शमीम अहमद ने कहा कि आज के समय में विकास और जनसंख्या के बीच संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी ईमानदारी से पालन करे, शिक्षा को प्राथमिकता दे, स्वास्थ्य के प्रति सजग रहे तथा पर्यावरण संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाए, तो निश्चित रूप से एक स्वस्थ, शिक्षित, समृद्ध एवं संतुलित समाज का निर्माण किया जा सकता है।

इसके पश्चात “जनसंख्या, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं पर्यावरण” विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें शिक्षकों ने विभिन्न आयामों पर विस्तार से अपने विचार प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने कहा कि तेजी से बढ़ती जनसंख्या के कारण प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे जल, वन, भूमि तथा ऊर्जा स्रोतों का अत्यधिक दोहन हो रहा है। इसके परिणामस्वरूप प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, बेरोजगारी, कुपोषण, गरीबी एवं स्वास्थ्य संबंधी अनेक समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार तथा जनसंख्या के प्रति जिम्मेदार दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक रहा। प्रशिक्षु विद्यार्थियों ने अत्यंत प्रभावशाली अभिनय के माध्यम से यह दर्शाया कि अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि किस प्रकार परिवार, समाज एवं राष्ट्र के विकास में बाधा उत्पन्न करती है। नाटक में छोटे परिवार के लाभ, महिलाओं की शिक्षा, परिवार नियोजन, बाल विवाह की रोकथाम, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, स्वच्छ पर्यावरण तथा सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे विषयों को सरल एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों के जीवंत अभिनय, प्रभावशाली संवाद एवं सामाजिक संदेश ने उपस्थित सभी लोगों को प्रभावित किया। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया तथा उनके प्रयासों की सराहना की।

इस अवसर पर निबंध लेखन प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने “जनसंख्या, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं पर्यावरण” विषय पर अपने विचारों को तार्किक, तथ्यपरक एवं रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया। निबंधों में जनसंख्या वृद्धि के कारण उत्पन्न सामाजिक एवं आर्थिक समस्याओं के साथ-साथ उनके समाधान के लिए शिक्षा, जागरूकता, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार तथा पर्यावरण संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया गया। निर्णायक मंडल ने प्रतिभागियों की अभिव्यक्ति, विषय की समझ, भाषा-शैली तथा मौलिकता के आधार पर श्रेष्ठ निबंधों का चयन किया।

कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता ने भी सभी का ध्यान आकर्षित किया। छात्र-छात्राओं ने अपनी सृजनात्मक कला के माध्यम से जनसंख्या नियंत्रण, स्वस्थ जीवनशैली, स्वच्छ पर्यावरण, वृक्षारोपण, जल संरक्षण, शिक्षा का प्रसार तथा छोटे परिवार के महत्व को अत्यंत सुंदर एवं प्रभावशाली ढंग से चित्रित किया। रंगों एवं संदेशों से सुसज्जित पोस्टरों ने यह स्पष्ट किया कि युवा पीढ़ी सामाजिक एवं पर्यावरणीय मुद्दों के प्रति कितनी संवेदनशील है। प्रदर्शित पोस्टरों को उपस्थित शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने खूब सराहा।

महाविद्यालय के शिक्षकों ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाले नहीं होते, बल्कि समाज निर्माण के महत्वपूर्ण आधार भी होते हैं। इसलिए शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे ऐसे शिक्षकों का निर्माण करें जो भविष्य की पीढ़ियों को केवल पाठ्यपुस्तक का ज्ञान ही नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता तथा जनसंख्या संतुलन जैसे महत्वपूर्ण विषयों के प्रति भी संवेदनशील बनाएँ।

कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि शिक्षा ही वह माध्यम है जिसके द्वारा समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। विशेष रूप से महिलाओं की शिक्षा से परिवार नियोजन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, आर्थिक सशक्तिकरण तथा सामाजिक विकास को नई दिशा मिलती है। जब समाज शिक्षित होगा, तभी जनसंख्या वृद्धि पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों में जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी।

कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रशिक्षु छात्र-छात्राओं ने जनसंख्या संतुलन, स्वास्थ्य सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति स्वयं जागरूक रहने और समाज में भी जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया। विद्यार्थियों ने यह भी प्रतिज्ञा की कि वे जल संरक्षण, वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता निभाएँगे।

संपूर्ण कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण, अनुशासित एवं प्रेरणादायक वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी एवं सभी प्रशिक्षु छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने उपस्थित सभी लोगों को यह संदेश दिया कि जनसंख्या, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए विषय हैं तथा इनके बीच संतुलन स्थापित करके ही सतत एवं समावेशी विकास का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। अल-इकरा टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम न केवल विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन का माध्यम बना, बल्कि समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी एवं संवेदनशीलता को भी सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ।


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