
जमशेदपुर। आस्था स्पेस टाउन में दुर्गा पूजा का पर्व बड़े हर्षोल्लास, उत्साह और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। पूजा के दौरान प्रत्येक संध्या को विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें सोसाइटी के निवासियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। पूरे परिसर में उत्सव, उमंग और सांस्कृतिक उल्लास का वातावरण छाया रहा। षष्ठी के दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन श्रीमती शालिनी सिन्हा के संयोजन में किया गया। कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने अपनी कला और पूतिभा का सुंदर प्रदर्शन किया, जिससे संध्या यादगार बन गई। सप्तमी , अष्टमी तथा नवमी के अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संयोजन श्रीमती मंदिरा बोस ने किया। उनके कुशल निर्देशन में प्रस्तुत कार्यक्रमों ने दर्शकों का मन मोह लिया। इन आयोजनों की विशेषता यह रही कि इनमें केवल बच्चों ने ही नहीं, बल्कि महिलाओं ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इनमें महिलाओं द्वारा प्रस्तुत महाभारत की द्रौपदी चीर हरण का दृश्य सबको अपनी ओर आकर्षित किया ।
मंदिरा जी के कार्यक्रमों में डांडिया, नृत्य नाटिका ‘महिषासुर मर्दिनी’, पौराणिक कथाओं पर आधारित नृत्य तथा बॉलीवुड के सदाबहार रेट्रो गीतों पर आकर्षक प्रस्तुतियाँ शामिल थीं। प्रत्येक दिन के लिए एक अलग थीम निर्धारित की गई थी, जिसने कार्यक्रमों में नवीनता और विविधता का रंग भर दिया। भक्ति, परंपरा और मनोरंजन के अनूठे संगम ने हर शाम को विशेष बना दिया।

विशेष आकर्षण रही नृत्य नाटिका

‘महिषासुर मर्दिनी’, जिसमें देवी दुर्गा के नौ अवतारों का प्रभावशाली चित्रण किया गया। इस प्रस्तुतिकरण के माध्यम से देवी के विविध रूपों, शक्ति और महिषासुर पर उनकी विजय की गाथा को सजीव रूप में दर्शाया गया। प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और उत्सव में भक्ति एवं आध्यात्मिकता का विशेष रंग भर दिया।
वहीं, डांडिया और रेट्रो प्रस्तुतियों ने उत्सव में उल्लास और मनोरंजन का समावेश किया। सभी आयु वर्ग के लोगों ने कार्यक्रमों का भरपूर आनंद लिया और प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। आस्था स्पेस टाउन का दुर्गा पूजा उत्सव सामुदायिक एकता, सांस्कृतिक समृद्धि और सामूहिक सहभागिता का सुंदर उदाहरण बना। इन आयोजनों ने न केवल उत्सव की रौनक बढ़ाई, बल्कि सोसाइटी के निवासियों के बीच आपसी सौहार्द और अपनत्व की भावना को भी मजबूत किया। इस प्रकार, आस्था स्पेस टाउन में दुर्गा पूजा की प्रत्येक संध्या भक्ति, कला, संस्कृति और उल्लास से सराबोर रही तथा सभी के लिए अविस्मरणीय यादें छोड़ गई।
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