
संवाददाता अंतर्कथा केरेडारी बालमुकुंद दास
केरेडारी, सोहराय पर्व क्यों और कैसे मनाया जाता है-

खास करके झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़ ,उड़ीसा में आदिवासी और मूलवसी समुदाय द्वारा मनाया जाने वाला एक प्रमुख फसल और पशुधन उत्सव है सोहराय ,झारखंड के आदिवासी और मूलवासी का प्रमुख और अत्यंत प्राचीन कृषि -पशुपालन पर्व, यह पर्व विशेष रूप से पशुधन (गया – बैल ) और नई फसल के सम्मान में मनाया जाता है सोहराय को आदिवासी और मूलवासी समाज में धन – धन्य, पशु और प्राकृतिक के प्रति कृतज्ञता पर दीपावली के आसपास (अक्टूबर नवंबर) मनाया जाता है कही जनवरी में तीन से पांच दिन तक फसल काटने के बाद मनाया जाता है पर्व से पहले घर -आंगन और गौशालाओ की साफ -सफाई की जाती है दीवारों पर गोबर -मिट्टी से सुंदर सोहराय चित्रकला बनाई जाती है जो झारखंड के प्रसिद्ध लोककला है

गाय- बैल को नहलाया जाता है उनके सीगों पर रंग लगाया जाता है गले में फूल की माला पहनाया जाता है पशुओं को नए चावल, गुड , खिचड़ी खिलाई जाती है उनकी विधिवत पूजा की जाती है प्राकृतिक और देवताओं का भार व्यक्त किया जाता है, आदिवासी और मूलवासी समाज धरती , वन- देवता और ग्राम देवता को धन्यवाद देता है उन्होंने अच्छी फसल और पशुधन दिया ,
नृत्य- संगीत और उत्सव मनाई जाती है पुरुष महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में मंदार, ढोल, नगाड़ा, की धुन पर सामूहिक नृत्य करते हैं गीतों में खेती,पशु, और प्रकृति की महिमा का वर्णन होता है सोहराय पर्व केवल एक त्यौहार नहीं बल्कि आदिवासी और मूलवासी समाज के जीवन शैली संस्कृति और प्राकृतिक- प्रेम का प्रतीक है यह हमें सिखाता है कि विकास के साथ-साथ प्राकृतिक और पशुओं का सम्मान करना भी उतना ही आवश्यक है
सोहराय पर्व का महत्व , यह पर्व मानव, पशु और प्रकृति के बीच संतुलन का संदेश देता है आदिवासी और मूलवासी संस्कृति कला और परंपरा को जीवित रखना है
There is no ads to display, Please add some


Post Disclaimer
स्पष्टीकरण : यह अंतर्कथा पोर्टल की ऑटोमेटेड न्यूज़ फीड है और इसे अंतर्कथा डॉट कॉम की टीम ने सम्पादित नहीं किया है
Disclaimer :- This is an automated news feed of Antarkatha News Portal. It has not been edited by the Team of Antarkatha.com
