
सरायकेला: चांडिल में झारखंड श्रमिक संघ की बैठक, संघ को मजबूत करने और विस्तार पर हुई चर्चा, तीन माह के अंतराल में होगा पूर्ण चुनाव, शैलेंद्र मेथी ने कहा, जल, जंगल, जमीन और मजदूरों की रक्षा के लिए लड़ाई जारी रहेगी ।
चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के टाटा-रांची मुख्य राज्य मार्ग एनएच-33 स्थित होटल सोहराई में झारखंड श्रमिक संघ के प्रफुल सिंह मुंडा की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में मुख्य रूप से केंद्रीय महासचिव शैलेंद्र मेथी, रिजु माझी सहित संघ के अन्य नेता उपस्थित थे।

बैठक में संघ को मजबूत करने और उसके विस्तार पर चर्चा की गई। नेताओं ने कहा कि संघ को मजबूत करने के लिए सेना की तरह मजबूत होना जरूरी है। झारखंड राज्य की अलग मांग की लड़ाई जल, जंगल, जमीन की सुरक्षा को लेकर लड़ी गई और लड़कर झारखंड राज्य बना। आज राज्य में जल, जंगल, जमीन सुरक्षित नहीं है, क्योंकि नदी-नाला और जंगल पर्यावरण से दूषित होने लगे हैं। जंगल की कटाई हो रही है, जंगल और वन्य जीव-जंतु सुरक्षित नहीं हैं।

बैठक में संघ को मजबूती और विस्तार देने के लिए नए रूप से समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष, सचिव और सदस्यता ग्रहण की तैयारी पर चर्चा की गई। समिति के नेता इस तैयारी में जुट गए हैं। एडहॉक कमेटी का तीन माह के अंतराल में पूर्ण चुनाव होगा।
शैलेंद्र मेथी ने कहा कि झारखंड सरकार बनी है, लेकिन उसके ब्यूरोक्रेट्स सरकार को बदनाम करने का काम कर रहे हैं। सरकार बदनाम हो रही है और सरकार के ऊपर प्रहार किया जा रहा है। केंद्र की सरकार और यहां के ब्यूरोक्रेट्स को आदिवासी राज्य बर्दाश्त नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि 2019 में सरकार बनने के बाद कोविड काल में माननीय हेमंत सोरेन और गुरुजी के नेतृत्व में सरकार को किसी तरह संभाला गया और 2019 के बाद 2025 तक सरकार को संभालने में ही समय लगा। गुरुजी के जाने के बाद भी मजदूर आंदोलन से लेकर जमीन बचाओ, जंगल बचाओ, जल बचाओ, मजदूर बचाओ आंदोलन के लिए प्रयास किया जा रहा है। लेकिन यहां का तंत्र न्याय नहीं दे रहा है, बल्कि प्रताड़ित कर रहा है।
उन्होंने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा से संबंधित झारखंड श्रमिक संघ मजदूरों का संघ है। छात्र संगठन सहित तमाम संगठन मुक्ति मोर्चा के साथ लड़ाई लड़कर झारखंड राज्य बनाए हैं। झारखंड में रहने वाले सभी आदिवासी हैं। अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति का क्राइटेरिया बना हुआ है। लोगों को दिग्भ्रमित करने और विभाजन करने के लिए इस तरह की आवाज उठाई जा रही है कि यह आदिवासी की पार्टी है।
शैलेंद्र मेथी ने कहा कि आज मईया योजना सहित कई योजनाएं लाई जा रही हैं। मनरेगा में बड़ी घटना घटी। अतिक्रमण बढ़ा और पूरे क्षेत्र में उद्योग बस गए। आदिवासियों को उसका मुआवजा नहीं मिला। स्वर्णरेखा परियोजना बनी, 40-45 साल के बाद भी मुआवजा वालों को लूटा जा रहा है। जिसको 5 लाख मुआवजा मिलता है, उसका 2.5 लाख बिचौलिया लूट रहा है। वृद्धा पेंशन और विधवा पेंशन में भी इस तरह की विसंगतियां कर दी गई हैं कि 80-85 साल के बुजुर्ग ब्लॉक का दरवाजा खटखटा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य के झारखंडियों को बचाओ। जल, जंगल, जमीन और मजदूर, इन तीनों का हस्तांतरण किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने मजदूर कानून को हस्तांतरित कर 44 कानूनों को तोड़कर चार कानून में ला दिया, जिससे मजदूरों के अधिकारों की हत्या हुई है। उद्योग और विकास के नाम पर आदिवासियों और हरिजनों की जमीन की लूट हो रही है, यह लूट नहीं होने दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि यहां की सिंचाई व्यवस्था में भी विसंगतियां हैं। बहुउद्देशीय स्वर्णरेखा परियोजना आज एक ही उद्देश्य में चल रही है, वह है मत्स्य पालन और जल का वितरण, चाहे वह उद्योग में हो, संस्थान में हो या शहर में हो। आज यहां के लोगों को सही ढंग से जल नहीं मिल रहा है। आज भी बहुत से क्षेत्र हैं, जहां के लोग और मवेशी तालाब और जुड़िया का पानी पी रहे हैं। यहां के उद्योगपति पानी को दूषित कर रहे हैं। पर्यावरण के नाम पर यहां लूट हो रही है।
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