
अपना और बच्चों का जन्मदिन होटलों में भव्य पार्टियाँ और दिखावा करने के स्थान पर अपने घर में विधि-विधान से भगवान का पूजन, हवन, भजन-कीर्तन और संतों का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। जन्मदिन पर ईश्वर का स्मरण करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, संस्कार और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। जन्मदिन पर मंदिर में भंडारे का आयोजन कर गरीबों, जरूरतमंदों, साधु-संतों और भक्तों को प्रसाद ग्रहण कराना सबसे बड़ा पुण्य है। जब किसी के जन्मोत्सव से अनेक लोगों का पेट भरता है और उनके चेहरे पर मुस्कान आती है, तभी उस जन्मदिन की वास्तविक सार्थकता सिद्ध होती है। भगवान का आशीर्वाद, माता-पिता और गुरुजनों का आशीर्वचन तथा सेवा और दान का भाव व्यक्ति के जीवन को सफल बनाता है।
जब-जब धरती पर धर्म की हानि होती है और अधर्म बढ़ता है, तब भगवान किसी न किसी रूप में अवतार लेते हैं। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं— “यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत, अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।” अर्थात जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब मैं स्वयं अवतार धारण करता हूँ। भगवान श्रीराम ने त्रेतायुग में मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में अवतार लेकर रावण का अंत किया , वहीं द्वापरयुग में भगवान श्रीकृष्ण ने बाल्यकाल से ही अनेक असुरों का संहार कर संसार को यह संदेश दिया कि ईश्वर अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।

मनुष्य की सबसे बड़ी संपत्ति धन नहीं, बल्कि संस्कारवान संतान होती है। धन-संपत्ति समय के साथ घट-बढ़ सकती है, लेकिन अच्छे संस्कारों से युक्त बच्चे परिवार, समाज और राष्ट्र का भविष्य संवारते हैं। जिन बच्चों के जीवन में सत्य, सेवा, विनम्रता, अनुशासन, माता-पिता के प्रति सम्मान और भगवान के प्रति आस्था होती है, वे अपने माता-पिता का ही नहीं, पूरे समाज का नाम रोशन करते हैं। प्रत्येक माता-पिता का प्रथम कर्तव्य केवल बच्चों को अच्छी शिक्षा देना नहीं, बल्कि उन्हें रामायण, श्रीमद्भागवत, श्रीमद्भगवद्गीता और सनातन संस्कृति के आदर्शों से परिचित कराकर संस्कारवान बनाना भी है।

हर सनातनी को अपने बच्चों के भीतर ध्रुव, प्रह्लाद और मीराबाई जी जैसा धर्म, संस्कार और भक्ति की शिक्षा का विस्तार करना चाहिए। ध्रुव जी ने अटूट संकल्प और तपस्या से भगवान को प्राप्त किया, प्रह्लाद जी ने विपरीत परिस्थितियों में भी भगवान का नाम नहीं छोड़ा, और मीराबाई ने अपना संपूर्ण जीवन श्रीकृष्ण की भक्ति को समर्पित कर दिया। यदि हमारे बच्चों के जीवन में भी ऐसे संस्कार, नैतिकता और ईश्वर के प्रति प्रेम का संचार होगा, तो वे न केवल अच्छे नागरिक बनेंगे, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए भी प्रेरणा बनेंगे।
हर सनातनी का केवल facebook पर हिंदू बनने से काम नहीं चलेगा। सच्चा सनातनी वही है जो अपने जीवन में धर्म, संस्कार, सेवा, सदाचार और भक्ति को अपनाए। यदि हम चाहते हैं कि सनातन धर्म सशक्त बने, तो हमें अपने घर-परिवार में बच्चों को रामायण, श्रीमद्भागवत और श्रीमद्भगवद्गीता का ज्ञान देना होगा, मंदिरों से जुड़ना होगा, धर्माचार का पालन करना होगा और अपने आचरण से समाज के लिए आदर्श बनना होगा।
जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ, संघर्ष या विपरीत परिस्थितियाँ क्यों न आएँ, हमें कभी भी धर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। सच्चा धर्म हमें धैर्य, सत्य, करुणा, संयम और कर्तव्य का पालन करना सिखाता है। परिस्थितियाँ बदल सकती हैं, लेकिन धर्म के प्रति हमारी निष्ठा कभी नहीं बदलनी चाहिए।जो व्यक्ति धर्म, सत्य और सदाचार के मार्ग पर चलता है, वह स्वयं तो उन्नति करता ही है, साथ ही अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए भी प्रेरणा बनता है। इसलिए हर परिस्थिति में धर्म का साथ देना ही जीवन की सबसे बड़ी विजय और मनुष्य का सच्चा कर्तव्य है। महाराज जी सुदामा कृष्ण के प्रसंग विस्तार से सुनाया और ब्रज के फूलों को होली खेली गयी।इस कथा को सफल बनाने में मंतोष साधू बाबा,तपन कुमार गोप सधर्मपत्नी श्रीमती पारूल देवी विनोद महतो सधर्मपत्नी ऊतरा देवी, कमलेश गोप, सधर्मपत्नी श्रीमती माया देवी,धीरेन चंन्द्र महतो ,अजीत झा, श्री राम सिंह,राजकिशोर गोप,महेंद्र प्रसाद,राजू गोप ,अमरजीत सिंह,हरिभजन गोप,नितेष गोप, सुभाष गिरी,गौतम गोप,अवधेश गिरी,शिवपुजन गोप,लखन लाल गिरी,,सुरेश साव ,ओमप्रकाश गिरी,कैलाश साव,आदि समस्त साबलपुर गोसाईडीह जियलगढा पंचायत के लोगों के सहयोग किया जा रहा है।
कल दिनांक 27/07/2026 दिन सोमवार को पूर्णाहुति हवन महाप्रसाद भंडारा दोपहर 3 बजे से आप सभी सनातनी सादर आमंत्रित हैं।
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