

सरायकेला : कांड्रा थाना क्षेत्र में स्वर्णरेखा नदी से अवैध बालू खनन का खेल फिर सुर्खियों में है। मनीकुई पुल के ठीक नीचे दिनदहाड़े चार-चार पोकलेन मशीनें लगाकर बड़े पैमाने पर बालू का उठाव किया जा रहा है। खुलेआम हो रहे इस अवैध कारोबार से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ने के साथ पुल की संरचनात्मक सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, मनीकुई पुल से सटे नदी क्षेत्र में भारी मशीनों से लगातार बालू निकासी हो रही है। दिन के उजाले में बिना किसी रोक-टोक के चल रहे इस काम से संदेह गहरा रहा है कि क्या जिला प्रशासन और खनन विभाग को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है।
पुल की नींव को खतरा: …? विशेषज्ञों का मानना है कि नदी के भीतर इस तरह का अनियंत्रित खनन बेहद खतरनाक है। पुल के पिलरों के आसपास से अत्यधिक बालू निकासी होने पर उसकी नींव कमजोर हो सकती है। इससे भविष्य में पुल धंसने या बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके अलावा नदी की धारा, तलछट संरचना और आसपास का भूगोल भी प्रभावित हो रहा है।
नियमों के मुताबिक किसी भी पुल से 500 मीटर के दायरे में खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है। बावजूद इसके मनीकुई पुल के नीचे से ही बालू निकाली जा रही है, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है।
मिलीभगत का आरोप: ..? स्थानीय लोगों का आरोप है कि इतने बड़े पैमाने पर मशीनों से खनन बिना प्रशासनिक संरक्षण के संभव नहीं है। दिन-रात सैकड़ों हाइवा और ट्रैक्टरों से बालू ढुलाई हो रही है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है।
लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मनीकुई पुल के पास हो रहे अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाई जाए और दोषी माफियाओं के साथ इसमें संलिप्त अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो। साथ ही पुल की मजबूती की जांच कराई जाए।
फिलहाल इस मामले में खनन विभाग और कांड्रा थाना का कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
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