
सरायकेला :चांडिल और तमाड़ वन क्षेत्र से भटककर दर्जनों जंगली हाथियों का झुंड ग्रामीण इलाकों में पहुंच गया है, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। बुधवार को सालगाडीह, शहनडीह और पलासडीह के आसपास करीब 7 हाथियों का झुंड देखा गया। वहीं कुकड़ू प्रखंड के दरुदा जंगल में भी दर्जनों हाथियों के झुंड को ग्रामीणों ने भ्रमण करते देखा।
वन विभाग की टीम ने आसपास के ग्रामीणों को सतर्क रहने और रात में घर से बाहर न निकलने की चेतावनी दी है। कुकड़ू के डाटम जंगल में भी एक अकेला हाथी घूम रहा है, जिससे ग्रामीणों में भय व्याप्त है।

*अवैध खनन बना मुख्य कारण*

स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का आरोप है कि झारखंड में वन क्षेत्रों में हो रहे अवैध खनन के कारण जंगलों में वन्य जीवों का प्राकृतिक आवास उजड़ गया है। पत्थर खदानों और क्रशरों के कारण जंगल में पानी के स्रोत सूख गए हैं। भोजन और पानी की तलाश में हाथी अब जंगल छोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं।
*रतजगा करने को मजबूर ग्रामीण*
सालगाडीह के ग्रामीण सुनील महतो ने बताया, “पिछले एक सप्ताह से हाथियों का झुंड गांव के आसपास मंडरा रहा है। खेतों में लगी फसल को रौंद रहे हैं। डर के कारण पूरी रात जगकर रखवाली करनी पड़ रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि वन एवं पर्यावरण विभाग की अनदेखी के कारण हाथियों का झुंड भटककर रिहायशी इलाकों में पहुंच रहा है। समय पर सूचना देने के बावजूद वन विभाग की टीम देर से पहुंचती है। हाथी भगाने के लिए पर्याप्त संसाधन भी उपलब्ध नहीं कराए जा रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वन क्षेत्रों में अवैध खनन पर पूरी तरह रोक नहीं लगती और हाथियों के लिए कॉरिडोर सुरक्षित नहीं किए जाते, तब तक मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं रुकना मुश्किल है।
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