
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार,सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहा जाता है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार पूरे साल में बारह संक्रान्तियां होती हैं। संक्रांति पर सूर्य देव की पूजा का विधान है। इस माह 16 नवंबर को सूर्यदेव तुला राशि से वृश्चिक राशि में गोचर कर रहें हैं, और इस दिन को वृश्चिक संक्रांति के नाम से मनाया जाएगा।

आज हम आपके लिए इस लेख में वृश्चिक संक्रांति के शुभ मुहूर्त और महत्व से जुड़ी हुई जानकारी लेकर आए हैं।

*कब मनाई जाएगी वृश्चिक संक्रांति-*
*वृश्चिक संक्रान्ति 16 नवम्बर 2022, दिन बुधवार को मनाई जाएगी।*
*वृश्चिक संक्रान्ति पुण्य काल -* 12:04 PM से 05:50 PM तक
*समय अवधि -* 05 घण्टे 46 मिनट
*वृश्चिक संक्रान्ति महा पुण्य काल -* 03:55 PM से 05:50 PM तक
समय अवधि – 01 घण्टा 55 मिनट
*वृश्चिक संक्रांति का महत्व -*
हिंदू शास्त्र में वृश्चिक संक्रांति एक बेहद पवित्र दिन माना जाता है। इस दिन पूजा-पाठ करने से धन से जुड़ी समस्यायों का समाधान हो जाता है।
इस दिन श्राद्ध, पितृ तर्पण भी किए जाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन दान पुण्य करने से विशेष फल की प्राप्ति होती। वृश्चिक संक्रांति के दिन गाय दान करने का भी विधान है।
व्यापार और नौकरीपेशा लोगों के लिए भी यह दिन खास है, इस दिन पूजा करने से उन्हें जीवन में उन्नति प्राप्त होती है।
*इन कार्यों को करने से मिलेगा आपको विशेष लाभ -*
वृश्चिक संक्रांति के दिन सूर्य देव को अर्घ्य अवश्य दें और साथ में ‘ऊँ सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करें।
वृश्चिक संक्रांति के दिन भगवान शिव की पूजा करें, इससे आपको उनकी कृपा प्राप्त होगी।
वृश्चिक संक्रांति के दिन पीपल के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाएं।
*इस दिन किसी ज़रूरतमंद व्यक्ति को दान-दक्षिणा देने से भी आपका भाग्योदय होगा।*
*इस दिन जिन लोगों का जन्म हुआ है वह अपने माता-पिता का आशीर्वाद ज़रूर लें।*
*पितृ तर्पण और श्राद्ध करने के लिए भी यह दिन खास है।*
*तो यह थी वृश्चिक संक्रांति की तिथि, मुहूर्त और महत्व से जुड़ी विशेष जानकारी, ऐसी ही अन्य जानकारी के लिए आप जुड़े रहें।*
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