

झरिया (धनबाद):स्टेशन रोड स्थित श्री सत्यनारायण मंदिर परिसर में संचालित संस्कृत पाठशाला में आज भक्ति और ज्ञान की त्रिवेणी बही। 3 मई को आयोजित इस विशेष सत्र में न केवल बच्चों ने आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया, बल्कि संस्कृत भाषा की व्यावहारिक बारीकियों को भी समझा।

संस्कृत पाठशाला में आज मुख्य रूप से श्रीमद्भगवद्गीता के पंद्रहवें अध्याय ‘पुरुषोत्तमयोग’ का सामूहिक अभ्यास कराया गया। आचार्य प्रियंक भट्ट ने विद्यार्थियों को श्लोकों के शुद्ध उच्चारण और उनके गूढ़ अर्थों से अवगत कराया।
आध्यात्मिक शिक्षा के साथ-साथ बच्चों के मनोरंजन और भाषाई विकास के लिए कई रोचक गतिविधियाँ आयोजित की गईं। इसके माध्यम से बच्चों के शब्दकोश का परीक्षण हुआ।दैनिक जीवन में संस्कृत में वार्तालाप करने का अभ्यास। संस्कृत में पहाड़ा (Table) वाचन और मधुर संस्कृत गीतों की प्रस्तुति। आज का दिन पाठशाला के लिए इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि क्षेत्र के प्रसिद्ध समाजसेवी हिम्मतभाई राठौड़ का जन्मदिन था। इस अवसर पर उन्होंने पाठशाला पहुँचकर बच्चों का उत्साहवर्धन किया और अपने जन्मदिवस की खुशी विद्यार्थियों के बीच प्रसाद वितरण कर साझा की। उनकी इस पहल की मंदिर समिति और अभिभावकों ने सराहना की।
इस पाठशाला में शिक्षा ग्रहण करने के लिए बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। उपस्थित होने वाले मुख्य विद्यार्थियों में चेल्सी गोयल, माही कुमारी, प्राची कुमारी, संजना, कुमकुम, लक्ष्मी, दिव्या, वैष्णवी, स्वाति, लाडो, श्रद्धा, आस्था, सौम्या, सोनाली, अनमोल कुमार, दिव्यांश सिंह, आयुष कुमार, सत्या गुप्ता, सूरज ठक्कर, रौनक कुमार, युगवीर साव, राजवीर, रितुराज, आदित्य कुमार, महेंद्र कुमार, आदर्श कुमार और प्रथम जोशी सहित अन्य कई बच्चे शामिल थे।
झरिया की यह संस्कृत पाठशाला नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और सनातन संस्कृति से जोड़ने का एक सराहनीय प्रयास कर रही है, जहाँ आधुनिक शिक्षा के बीच प्राचीन भाषा को जीवंत रखा जा रहा है।
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