
झरिया: आगामी विधानसभा सत्र और उससे पहले होने वाली विधायक दल की बैठक को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। झरिया की लोकप्रिय विधायक रागिनी सिंह ने आगामी सत्र और जनहित के तमाम ज्वलंत मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार करने का स्पष्ट संकेत दिया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि इस बार विधानसभा के पटल पर झरिया की जलापूर्ति, चरमराई बिजली व्यवस्था, पेंशन योजनाओं के ठप होने और छात्र आंदोलन के मुद्दों को पूरी प्रमुखता और जोर-शोर से उठाया जाएगा।
विधायक दल की बैठक से पहले रणनीति तय….

सत्र की शुरुआत से पूर्व होने वाली बैठकों के संदर्भ में बात करते हुए विधायक रागिनी सिंह ने कहा कि यह एक संसदीय परंपरा है कि हर सत्र के शुरू होने से पहले सभी दलों की विधायक दल की बैठकें होती हैं, जिनमें जनहित के विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत और गंभीर चर्चा की जाती है। उन्होंने वर्तमान सरकार के रवैये पर गहरा क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि आज चाहे छात्र हों या आम जनता, राज्य की जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। सरकार से क्षेत्र के विकास के लिए जिस तरह के सकारात्मक सहयोग की अपेक्षा होती है, वह पूरी तरह से नदारद है।

“दिखावटी विकास नहीं, मूलभूत सुविधाएं चाहिए”…..
विधायक ने सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जनता को बड़ी-बड़ी सड़कों या दिखावटी विकास की आवश्यकता नहीं है, बल्कि उन्हें जीने के लिए बुनियादी और मूलभूत सुविधाएं चाहिए। आज स्थिति यह है कि पीने के पानी, बिजली जैसी अनिवार्य सेवाओं के साथ-साथ विधवा पेंशन और दिव्यांग पेंशन का पूरा सिस्टम ही ठप पड़ चुका है।
उन्होंने नगर निगम की दयनीय स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि नगर निगमों के पास विकास कार्यों के लिए फंड तक उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है, जिससे शहरी इलाकों में बदहाली बढ़ती जा रही है। सरकार को अपना सौतेला व्यवहार और भेदभावपूर्ण रवैया त्यागना होगा तथा पूरे राज्य को समान दृष्टि से देखना होगा, ताकि हर घर की बेटी-बहू के लिए सड़क, नाली, पानी और बिजली जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं सुनिश्चित हो सकें।
बिजली-पानी संकट और छात्र आंदोलन पर सरकार को घेराव
झरिया और पूरे झारखंड में व्याप्त बिजली-पानी के गंभीर संकट पर चिंता जताते हुए विधायक ने कहा कि केवल झरिया ही नहीं, बल्कि पूरा प्रदेश इस समस्या से जूझ रहा है। इसके खिलाफ पूर्व में भी बड़ा आंदोलन किया जा चुका है, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी शिरकत की थी। उन्होंने कहा कि झरिया शहर में 6 से 9 घंटे तक लगातार बिजली कटौती हो रही है, जिससे इस भीषण गर्मी में आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बिजली विभाग का रवैया इतना गैर-जिम्मेदाराना है कि संकट के समय अधिकारियों द्वारा आम जनता के फोन तक नहीं उठाए जाते। ट्रांसफॉर्मर से लेकर पूरी विद्युत व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है, जिसका सीधा असर जलापूर्ति पर पड़ रहा है।
इसके साथ ही, वर्तमान में अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरकर आंदोलन कर रहे छात्रों के समर्थन में बोलते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक छात्रों को न्याय नहीं मिल जाता, उनकी यह लड़ाई अनवरत जारी रहेगी।
अधिकारियों की उदासीनता पर विधानसभा में होगी कार्रवाई
स्थानीय स्तर पर अधिकारियों द्वारा जनता की समस्याओं को अनसुना किए जाने और ज्ञापन सौंपे जाने के बावजूद समाधान न मिलने के सवाल पर विधायक ने दृढ़ता से कहा कि वे इन तमाम लापरवाहियों को सदन के भीतर प्रमुखता से रखेंगी। उन्होंने विश्वास दिलाया कि जनता के हक और अधिकारों की इस लड़ाई में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाएगी और सरकार को सदन के माध्यम से जवाबदेह बनाया जाएगा।
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