
झरिया : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) झरिया नगर की ओर से आज ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष त्रयोदशी (तेरस) के पावन अवसर पर ‘हिंदू साम्राज्य दिवस उत्सव’ अत्यंत गरिमामयी और धूमधाम के साथ मनाया गया। इस विशेष उत्सव का आयोजन स्थानीय उद्यान प्रभात शाखा में किया गया, जिसमें भारी संख्या में स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक और अनुशासित पद्धति से हुआ। सर्वप्रथम ध्वजारोहण किया गया, जिसके बाद उपस्थित सभी स्वयंसेवकों ने परम पवित्र भगवा ध्वज को सामूहिक रूप से प्रणाम किया। इसके पश्चात मुख्य अतिथियों—झरिया नगर संघचालक डॉक्टर देवकीनंदन पांडे एवं झरिया नगर बौद्धिक प्रमुख हरीश कुमार जोशी ने छत्रपति शिवाजी महाराज के चित्र पर पूरी श्रद्धा के साथ तिलक लगाया और माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। इसके बाद स्वयंसेवकों द्वारा सामूहिक गीत, अमृत वचन और व्यक्तिगत गीत की प्रस्तुति दी गई, जिससे पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति के रंग में सराबोर हो गया।
छत्रपति शिवाजी महाराज ने संपूर्ण भारतवर्ष को एक सूत्र में बांधा: हरीश कुमार जोशी

उत्सव में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित अधिवक्ता सह बौद्धिक प्रमुख हरीश कुमार जोशी का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। अपने बौद्धिक संबोधन में उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और उनके महान कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आज से लगभग 408 वर्ष पूर्व रायगढ़ के ऐतिहासिक किले में छत्रपति शिवाजी महाराज का भव्य राज्याभिषेक हुआ था, जिसने भारत के इतिहास में हिंदू साम्राज्य दिवस की नींव रखी।

मुगल आक्रांताओं के भीषण अत्याचारों के बीच शिवाजी महाराज ने एक ऐसे स्वतंत्र साम्राज्य की स्थापना की, जो पूरी तरह से अपनी समृद्ध संस्कृति, मर्यादाओं और मानवीय मूल्यों पर आधारित था। शौर्य, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति के अप्रतिम प्रतीक शिवाजी महाराज ने न केवल संपूर्ण भारतवर्ष को एक सूत्र में बांधा, बल्कि दुश्मनों को धूल चटाने के लिए ‘गुरिल्ला युद्ध’ (छापामार पद्धति) का कुशलतापूर्वक संचालन किया। समुद्री मार्ग से होने वाले विदेशी हमलों का करारा जवाब देने के लिए उन्होंने एक मजबूत नौसेना का गठन किया। इसके साथ ही उन्होंने तुलजाभवानी मंदिर और पूना में विशाल गणेश मंदिर का निर्माण करवाकर भारत के हिंदुओं में एक नवीन ऊर्जा और प्राणों का संचार किया।
इस गौरवशाली उत्सव के अवसर पर क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक और संघ के पदाधिकारी उपस्थित रहे। इनमें मुख्य रूप से आचार्य बलदेव पांडे, सह कार्यवाह अखिल देव, सुखलाल पंसारी, डॉक्टर नीरज पांडे,
अजीत गुप्ता, विश्वनाथ साव, अजय वर्मा, गिरिजा सिंह, गोरेलाल, महेश प्रसाद गुप्ता, लक्ष्मीनारायण जी, संदीप दत्ता, मुख्य शिक्षक छोटू जी, मधुसूदन जी, मनीष कुमार, ब्रजनंदन बरनवाल, नारायण साव, रामलखन जी और पंचम जी सहित अनेक स्वयंसेवक शामिल थे।
कार्यक्रम के समापन पर संघ की पारंपरिक प्रार्थना की गई, जिसके बाद सभी ने राष्ट्र और समाज की सेवा का संकल्प लेते हुए उत्सव का समापन किया।
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