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झरिया का ‘नर्क’ दर्शन: ऊपर DVC की मार, नीचे नालियों की धार… जनता जाए तो जाए कहाँ?

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Apr 24, 2026
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झरिया: अगर आप झरिया में रहते हैं, तो बधाई हो! आप एक साथ कई ‘साहसिक’ कारनामों का हिस्सा हैं। यहाँ की जनता इन दिनों एक ऐसे त्रिकोण में फंसी है जहाँ एक तरफ BCCL की आग और विस्थापन का डर है, तो दूसरी तरफ नगर निगम की सुस्ती। और रही-सही कसर DVC की लोडशेडिंग ने पूरी कर दी है। झरिया अब शहर नहीं, बल्कि समस्याओं का ‘म्यूजियम’ बनता जा रहा है।

 

गर्मी में बिजली गुल, नालियों में ‘हाउसफुल’

 

झरिया की सड़कों पर पैदल चलना अब किसी ‘खतरों के खिलाड़ी’ के टास्क से कम नहीं है। गर्मियों का पारा चढ़ते ही बिजली रानी रूठ जाती हैं, और जैसे ही आप ताजी हवा के लिए बाहर निकलते हैं, नालियों का ‘बजबजाता’ स्वागत आपका इंतजार कर रहा होता है। गंदी नालियों में पल रहे मच्छर और मक्खियां अब यहाँ के नए स्थाई निवासी बन चुके हैं, जो मोहल्ले वालों को मुफ्त में डेंगू और मलेरिया का ‘रिटर्न गिफ्ट’ देने को बेताब हैं।

 

नालियां हुईं ‘गायब’, अतिक्रमण का ‘अजब खेल’

 

हैरानी की बात तो यह है कि झरिया की कई नालियों ने अपना अस्तित्व ही खो दिया है। यहाँ के ‘प्रतिभाशाली’ अतिक्रमणकारियों ने नालियों के ऊपर ही अपनी दुकानें और आलीशान मकान सजा लिए हैं। “नक्शा? वह क्या होता है!”

, “प्रशासन की इजाजत? इसकी जरूरत किसे है!”

 

गांधी रोड से लेकर धर्मशाला रोड, लक्ष्मीनिया मोड़, कतरास मोड़ और टैक्सी स्टैंड तक, रसूखदारों ने सरकारी और रैयती जमीन पर ऐसा कब्जा जमाया है कि अब पानी को बहने के लिए रास्ता नहीं, बल्कि ‘जीपीएस’ की जरूरत है। नतीजा? नाली का पानी अब सड़क को ही अपना नया ठिकाना मान चुका है।

 

भक्ति मार्ग में ‘गंदगी’ का विघ्न

 

श्रद्धालुओं का हाल तो और भी बुरा है। सुबह-सुबह शुद्ध मन से मंदिर जाने वाले भक्तों को भगवान के दर्शन से पहले नाली के ‘दर्शन’ करने पड़ते हैं। टैक्सी स्टैंड के निवासी गुड्डू साव बड़े ही बेबसी भरे अंदाज में कहते हैं “साहब, पूजा करने जाना है तो इस गंदे पानी को पार करना ही होगा। अब भगवान ही मालिक हैं।” स्थिति यह है कि भक्त नहा-धोकर निकलते तो मंदिर के लिए हैं, लेकिन रास्ते की गंदगी उन्हें वापस नहाने पर मजबूर कर देती है। झरिया की जनता आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। एक तरफ विस्थापन का दंश और दूसरी तरफ बुनियादी सुविधाओं का अकाल। अब देखना यह है कि प्रशासन की नींद कब टूटती है या फिर झरिया के लोग इसी ‘नर्क’ को अपनी नियति मानकर जीने को मजबूर रहेंगे।


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