
जा पर कृपा करें त्रिपुरारी यह वाक्यांश “जा पर कृपा करें त्रिपुरारी” (जिस पर भगवान शिव की कृपा हो) सनातन धर्म के इस प्रसिद्ध भाव को दर्शाता है कि भगवान शंकर के आशीर्वाद से हर असंभव कार्य संभव हो जाता है।तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस के अनुसार, शिव और राम की भक्ति अभिन्न है。इस भाव से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध चौपाई है:”जा पर कृपा राम की होई, ता पर कृपा करहिं सब कोई॥”(अर्थात: जिस पर प्रभु श्री राम की कृपा होती है, उस पर संसार के सभी लोग और देवता भी कृपा करते हैं।)यह पंक्ति इंगित करती है कि महादेव (त्रिपुरारी) की कृपा से साधक को राम की भक्ति और शांति प्राप्ति होती है
काली मंदिर परिसर गोसाईडीह में आयोजित श्री राम कथा के दूसरे दिन श्री त्रिदेव शास्त्री जी महाराज ने कहा श्री राम की भक्ति ही अहंकार को नाश करती है

संसार में पद मिलने पर लोगों का अहंकार को आ जाना लेकिन प्रभु श्री राम की जिन पर कृपा है वह व्यक्ति बड़े पद प्राप्त करने के बावजूद भी अहंकारी नहीं होता है

श्री रामचरित्र मानस कथा का दीतय दिवस पर काफी संख्या में महिलाएं श्रद्धालुओं पुरुषों भक्त जनों का आगमन हुआ
मंदिर कमेटी गोसाईडीह श्री राम चरित्र मानसकथा का आयोजन किया जा रहा है
गोविंदपुर के प्रमुख श्री निर्मला सिंह, पूर्व उप प्रमुख डीएन सिंह जी एवं भाजपा नेता विक्रांत उपाध्याय जी सचिव एवं ऐके विश्वास जी मंदिर कमेटी अध्यक्ष मोहन राय जी अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार अशोक
गिरि जी राजकुमार गिरि विशेष रूप से कार्य की रूपरेखा तन मन धन के साथ रामचरितमानस की कथा इन्हीं के मार्गदर्शन से किया जा रहा है
रामचरितमानस की कथा आयोजन को सक्रिय रूप से मंदिर कमेटी के सभी सदस्य गण लगे हुए हैं
दिलीप सिंह , भोला लाल , इंद्रदेव पासवान , कामदेव पासवान विकास गिरि, शिक्षक मनोज गिरि , गणेश गिरि , विनोद गुप्ता , रूपा तिवारी राज कपूर गिरि, छोटू सिंह सत्येंद्र गिरि , सौरभ गिरि
दीपू गोप मंटू गोप किसुन गोप रेवत लाल गिरि , प्रकाश गोस्वामी सभी शाक्य रूप से आयोजन को सफल बनाने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं
कथा स्थल पर कथा आयोजन में मुख्य रूप से,डीएन सिंह , विक्रांत उपाध्याय , पूर्व मुखिया सुभाष गिरि वार्ड सदस्य परमेश्वर गोप चिकित्सक दिलीप गिरि
कथा में मौजूद रहकर व्यवस्था को देख रहे हैं महिलाओं में रूपा तिवारी एवं श्वेता झा का भी सहयोग भरपूर मंदिर कमेटी को मिल रहा है मंदिर कमेटी की ओर से इनको धन्यवाद्
श्री त्रिदेव शास्त्री जी के मुखारविंद से जो कथा हो रही है जनमानस के हृदय में पहुंच रही है उनकी मधुर आवाज उनके भजन का जो गायन है भक्तों को भाव विभोर कर देती है त्रिदेव शास्त्री जी की मुखारविंद यह जो कथा हो रही है सामाजिक प्रेरणा प्रेम
आध्यात्मिक विचार विमर्श किया गया है बाबा भोलेनाथ की कथा की चर्चा की गई
जब दक्ष प्रजापति है यज्ञ किया बाबा भोलेनाथ और माता सती को आमंत्रित नहीं किया सभी देवों को आमंत्रित किया जब महादेव जी से माता सती ने आज्ञा मांगी यज्ञ स्थल जाने के लिए तो महादेव जी ने जाने से मना किया क्योंकि वह जानते थे यह यज्ञ उनके अपमान के लिए किया गया है लेकिन माता सती नहीं मानी और बिना आमंत्रण के पहुंच जाती है जहां उनके साथ कोई खड़ा नहीं मिलता क्योंकि दक्ष प्रजापति ने पहले ही सबको बता चुके हैं सति जो उनकी पुत्री है एवं दामाद भोले शंकर
अगर यह स्थल पर पहुंचते हैं तो सभी पुत्री को मना किया गया कि उनसे वार्तालाप ना करें माता सती भगवान भोलेनाथ का अपमान सहन नहीं कर पाई और यज्ञ स्थल पर अग्नि प्रकट कर भस्म हो गए
बाबा भोलेनाथ ने यज्ञ को विध्वंस किया सबको उचित दंड दिया
बाद में माता सती का पूर्ण जन्म हिमालय के यहां पार्वती के रूप में होता है
और बड़े धूमधाम से भगवान शंकर के साथ उनका विवाह संपन्न होता है
भगवान भोलेनाथ माता पार्वती के विवाह के साथ कथा का कल दितय दिवस का समापन हुआ
आज संध्या 6:30 बजे से कथा रसास्वादन तृतीय दिवस है सभी श्रद्धालु गन समय पर पहुंच कर पुण्य का भागी बने
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