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सरायकेला जगन्नाथ मंदिर में ‘नेत्र उत्सव’ का भव्य आयोजन, प्रभु के नवयौवन रूप के दर्शन को उमड़ा जनसैलाब

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Jul 14, 2026
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सरायकेला: ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर में मंगलवार को ‘नेत्र उत्सव’ (नवयौवन) पूरी श्रद्धा, आस्था और उत्कलीय परंपरा के साथ हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। रथ यात्रा से ठीक एक दिन पूर्व आयोजित होने वाले इस पावन पर्व पर महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

 

परंपरा के अनुसार, प्रभु जगन्नाथ 15 दिनों के ‘अनसर’ (एकांतवास) में थे। अनसर गृह से रत्न सिंहासन पर विराजमान किया गया। रत्न सिंहासन पर विराजमान होने के बाद तीनों विग्रहों को भव्य और अलौकिक सिंगार किया गया।

मान्यता है कि 15 दिनों के विश्राम और सेवा-सत्कार के बाद आज महाप्रभु पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने भक्तों के बीच पहली बार प्रकट हुए।

 

मंदिर के मुख्य पुजारी ने बताया कि आज का दिन विशेष है क्योंकि भक्त पहली बार प्रभु के ‘नवयौवन’ रूप को निहारते हैं। आज के दिन प्रभु की आँखों को अंतिम रूप दिया जाता है, जिसे ‘नेत्र उत्सव’ कहा जाता है। भक्त प्रभु के इस दिव्य और अलौकिक रूप के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस कर रहे हैं। प्रभु से सभी भक्त परिवार में सुख समिति की कामना की। धार्मिक अनुष्ठान में राजा प्रताप आदित्य सिंहदेव शामिल हुए।

 

मंदिर परिसर में सुबह से ही ‘जय जगन्नाथ’ के नारों की गूँज रही है । श्रद्धालुओं का मानना है कि नवयौवन के दर्शन मात्र से ही जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। दूर-दराज से आए भक्त घंटों कतार में लगकर प्रभु के दर्शन प्राप्त किए।

 

नेत्र उत्सव के संपन्न होने के साथ ही अब कल (बुधवार) महाप्रभु जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा निकाली जाएगी। इसे लेकर प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े झऐप्रबंध किए हैं और मंदिर समिति द्वारा रथ को सजाने का कार्य अंतिम चरण में है। सरायकेला की गलियां भक्तिमय हो उठी हैं और हर कोई कल के मुख्य आयोजन की प्रतीक्षा में है।


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